Viral Fever : Causes, Symptoms, Treatment in Hindi | वायरल बुखार का इलाज


Viral Fever : Causes, Symptoms, Treatment in Hindi | जब किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (या 98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट) से अधिक हो जाता है तो वैसे व्यक्ति को बुखार से प्रभवित समझा जाता हैं । बुखार कई प्रकार का होता है जैसे अंदरूनी बुखार, दिमागी बुखार, टाइफाइड, वायरल फीवर और मलेरिया इनमे मुख्य हैं । सभी बुखार के लक्षण अमूमन एक जैसे होते हैं लेकिन सभी अलग अलग कारणों से होते हैं – यह ज्यादातर तब होता है जब हमारा शरीर किसी अन्य इंटरनल इन्फेक्शन जैसे फ्लू, मलेरिया आदि से लड़ रहा हो। यह इन्फेक्शन बैक्टीरियल या वायरल भी हो सकता है। इस लेख में हम आपको वायरल फीवर के कारण, वायरल फीवर के लक्षण और वायरल फीवर के इलाज के बारे में विस्तार पूर्वक बताने जा रहे हैं।




Viral Fever Details in Hindi | वायरल बुखार अथवा वायरल फीवर क्या हैं ?

वायरल बुखार वायरस जनित बुखार होता हैं जो की अधिकांशतः मौसम में बदलाव के कारण होता हैं। इस तरह के बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी तथा बड़ी तेजी से फैलते है। वायरल बुखार में शरीर का तापमान 100 से 103 डिग्री या इससे भी ज्यादा हो सकता है। इसके वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में साँस के द्वारा ज्यादातर फैलते हैं। फैलने के बाद यह एक से दो दिन तथा कभी-कभी कुछ घंटों में सक्रिय हो जाते है।
सामान्य रूप से Viral Fever का इन्फेक्शन 3 से 7 दिनों तक ही रहता है और कभी-कभी हफ्तों तक भी रह सकता है।

Viral Fever Causes in Hindi | वायरल बुखार अथवा वायरल फीवर के कारण ?

i) Viral Fever का सबसे मुख्य कारण हमारे शरीर की कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) होती हैं। प्रतिरक्षा तंत्र यानि की हमारा शरीर अगर किसी तरह के संक्रमण से लड़ने में असमर्थ रहता हैं तो वायरल फीवर का प्रमुख कारण हो सकता हैं
ii) चूकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता हैं अतः फ्लू के रोगी के सम्पर्क में आने पर, रोगी व्यक्ति से हाथ मिलाने, खांसने, छीकने या सामने से या नजदीक से बात करने से भी हो सकता हैं ।
iii) वातावरण में नमी बढ़ने के साथ वायरल फीवर ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि बारिश और सर्दी जैसे मौशमो में इसके रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी देखनो को मिलती हैं।
iv) ठंडे वातावरण के संपर्क में आने, फ्रिज का ठंडा पानी, शीतल पेय पीने आदि वायरल बुखार के कारण बन सकते हैं ।




Viral Fever Symptoms in Hindi | वायरल बुखार अथवा वायरल फीवर के लक्षण ?

i) शरीर का तापमान 101 डिग्री से 103 डिग्री या उससे ज्यादा रहना
ii) आँखों में लालिमा और जलन का एहसा
iii) खांसी और जुकाम होना
iv) जोड़ों में दर्द और सूजन होना
v) थकान और गले में दर्द होना
vi) नाक बहना
vii) बदन दर्द होना
viii) भूख न लगना
ix) मतली और उल्टी
x) सामान्य रूप से कमजोरी का एहसास होना

उपरोक्त दिए गए लक्षण सामान्यतः एक वायरल बुखार से ग्रसित व्यक्ति में पाया जाता हैं जो की अलग भी हो सकता हैं।

Viral Fever Treatment in Hindi | वायरल बुखार अथवा वायरल फीवर का इलाज ?

i) मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए।
ii) अगर रोगी के सर के साथ – साथ शरीर भी गर्म है तो नॉर्मल पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ें और उससे पूरे शरीर को पोंछें।
iii) मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल (Paracetamol) की एक गोली दे सकते हैं। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें।
iv) मरीज छींकने से पहले नाक और मुंह पर रुमाल रखें। जिससे इसका संक्रमण दूसरो में न फैले ।
v) तरल पदार्ध, खासकर पानी, फलों का रस और गर्म सूप अधिक मात्रा में लें।




Viral Fever Home Remedies in Hindi | वायरल बुखार का घरेलू इलाज ?

i) धनिया चाय (Coriander Tea) :- एक चम्मच धनिया दाने को एक गिलास पानी में डालें। और इसे गैस में रखकर उबाल लें। जब यह उबल जाए तब आप छन्नी के जरिए इसे छान लें और इसे एक कप में डालकर रोगी को दें, इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।
ii) चावल स्टार्च (Rice starch) :- एक भाग चावल और आधा भाग पानी डालकर चावल के आधा पकने तक पकाएं। इसके बाद पानी को छान कर अलग कर लें और इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर, गर्म गर्म ही पिएं। इससे वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।
iii) मेथी का पानी (Fenugreek Water) :- आधा कप पानी में में एक बड़ा चम्मच मेथी के बीज भिगोएँ। सुबह में, वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। कुछ और राहत के लिए मेथी के बीज, नींबू और शहद का एक मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है।
iv) तुलसी के पत्ते का काढ़ा (Brew of Basil leaves) :- आधे से एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी घट कर आधा न रह जाए। इस काढ़े का हर दो घंटे में रोगी को सेवन के लिए दे।
v) डिल बीज का काढ़ा (Brew of Dill seed) :- एक कप उबलते पानी में डिल के बीज डाल दे और उसे उबलनें दें इसके बाद इसमें एक चुटकी दालचीनी डालें और थोड़ी देर खौला दे और रोगी को गर्म चाय की तरह पिने के दे ।

Viral Fever Ayurvedic Treatment in Hindi | वायरल बुखार के आयुर्वेदिक इलाज

i) गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
ii) गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।
iii) त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।
iv) साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
v) बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें

Viral Fever Homeopathic Treatment in Hindi | वायरल बुखार के होम्योपैथी इलाज

i) तेज बुखार और सिर में दर्द का होना:- Belladona 200
ii) बुखार के साथ बदन और हाथ पैर दर्द का होना :- Bryonia Alba 30, Euptorium perf 30
iii) बुखार के साथ सिर में दर्द और खांसी का होना :- China ARS 30
iv) बुखार होने पर कमजोरी का होना :- Gelsemium 30
v) बुखार के साथ टट्टी का आना :- Baptisia 30

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