Swine Flu : causes, symptoms, Treatment in Hindi | स्वाइन फ्लू का इलाज


Swine Flu causes, symptoms, Treatment in Hindi, स्वाइन फ्लू या H1N1 इन्फ्लूएंजा दुनिया भर में तेजी से फैलने वाला एक वायरल बुखार है दिन पे दिन इनके मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही हैं जिसको देखते हुए स्वास्थ मंत्रालय ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए भरपूर इंतजाम कर रखे हैं । बरहाल आवश्यकता हैं तो इसके प्रति जागरूकता की लिहाजा आपका ये जानना जरूरी है कि स्वाइन फ्लू क्या है?, स्वाइन फ्लू किन कारणों से होता हैं?, स्वाइन फ्लू के कौन कौन से लक्षण हो सकते हैं? और स्वाइन फ्लू का प्रारंभिक तथा घरेलू इलाज क्या हैं?




स्वाइन फ्लू क्या है? | Swine Flu Details in Hindi

Swine Flu अथवा H1N1 इन्फ्लूएंजा एक प्रकार का संक्रामक वायरस हैं जिसकी पहचान सबसे पहले अप्रैल, 2009 में मैक्सिको में हुवी थी चूँकि इससे मरने वालो की संख्या काफी ज्यादा थीं इसलिए WHO ने जून, 2009 में इसे महामारी घोषित कर दिया था । क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से ये काफी मिलता-जुलता था। इसलिए इसे स्वाइन फ्लू का नाम दिया गया
स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस A से होने वाला इनफेक्शन है। इस वायरस को ही H1N1 कहा जाता है। कठोर सतह पर 24 घंटे और कोमल सतह पर 20 घंटे तक यह virus जीवित रह सकते हैं। ऐशे लोग जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है जैसे गर्भवती महिलायें, बच्चे, वृद्ध, डायविटीज रोगी, एचआईवी रोगी, दमा के रोगी व्रांकाइटिस के रोगी, नशे के लती, कुपोषण, एनीमिया एवं अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग इस वायरस के चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

Swine Flu Causes in Hindi | स्वाइन फ्लू के कारण

वातावरण में नमी बढ़ने के साथ स्वाइन फ्लू ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि बारिश और सर्दी जैसे मौशमो में इसके रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी देखनो को मिलती हैं । इसलिए इन दिनों में यदि किसी को सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो H1N1 की जांच कराना चाहिए।
स्वाइन फ्लू का संक्रमण किसी स्वाइन फ्लू के रोगी के सम्पर्क में आने पर, रोगी व्यक्ति से हाथ मिलाने, खांसने, छीकने या सामने से या नजदीक से बात करने से भी हो सकता हैं । यदि कोई व्यक्ति इस virus युक्त सूक्ष्म बूंदो से संक्रमित दरवाजे का हैंडल, कंप्यूटर कीबोर्ड, गिलास, तकिया, तौलिया या रिमोट इत्यादि वस्तु को छूता हैं और संक्रमित हाथो को अपने मुंह या नाक के पास रखता हैं तो वह व्यक्ति भी Swine Flu से संक्रमित हो सकता हैं।




Swine Flu Symptoms in Hindi | स्वाइन फ्लू के लक्षण

स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा जैसे ही होते हैं जैसे की

i) यदि बारिश और ठण्ड के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो,, तो यह स्वाइन फ्लू के एक लक्षण हो सकते हैं ।
ii) सिर एवं शरीर में दर्द रहना, मांस पेशी में खिचावट महसूस होना ।
iii) गले में खराश रहना जो कि ठण्ड में आम बात हैं, लेकिन अगर यह लम्बे समय तक ठीक नहीं हुआ हैं, तो यह स्वाइन फ्लू का कारण बन सकता हैं ।
iv) अपेक्षाकृत सांस लेने एवम छोड़ने की प्रक्रिया की गति में अधिकता होना अर्थात तेजी से सांस लेना छोड़ना |
v) थकावट महसूस होना, चिड़चिड़ापन महसूस होना ।
vi) पाचनक्रिया में परेशानी होना जैसे पेट ख़राब होना, उल्टी दस्त होना और समान्य उपचार के बावजूद ठीक ना होना।
vii) सर्दी होना ठंड में आम हैं लेकिन इसका प्रभाव बहुत वक्त तक रहना और लगातार नाक से पानी बहना स्वाइन फ्लू का एक कारण बन सकता हैं।
viii) छोटे बच्चो को बुखार के समय अत्यधिक चिडचिडा होना और शरीर का नीला पड़ना।
ix) वयस्कों में छाती अथवा पेट में दर्द, चक्कर आना ।
x) भूख कम महसूस होना एवं तेजी से वजन कम होना ।




Swine Flu Treatment in Hindi | स्वाइन फ्लू के इलाज

Swine Flu Home Remedies in Hindi (स्वाइन फ्लू का घरलू इलाज) के लिए नीचे दिए गए चीजों को उपयोग में ला सकते हैं

i) 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
ii) 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
iii) आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं. आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
iv) आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

Swine Flu Ayurvedic Treatment in Hindi | स्वाइन फ्लू के आयुर्वेदिक इलाज

i) गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
ii) गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।
iii) त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।
iv) साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
v) बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

Swine Flu Homeopathic Treatment in Hindi | स्वाइन फ्लू के होम्योपैथी इलाज

i) जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं: एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार।
ii)अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।
iii)जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं. इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें. यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।

Helpful Yogaasan for Swine Flu | स्वाइन फ्लू में सहायक योगासन

शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है।
i) कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।
ii) व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन. यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।

Tips to prevent Swine Flu in Hindi | स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सावधानियाँ ?

i) खांसते या छीकतें समय मुंह पर हाथ या रूमाल रखें।
ii) खाने से पहले हाथ-पैर अच्छी तरीके से धोयें।
iii) मास्क पहन कर ही मरीज के पास जायें।
iv) साफ रूमाल में मुंह ढके रहें।
v) खूब पानी पियें व पोषण युक्त भोजन करें।
vi) मरीज से कम से कम एक हाथ दूर रहें।
vii) भीड़-भाड़ इलाकों में न जाये।
viii)साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखें।
ix) यदि लक्षण दिखें तो तुरन्त चिकित्सक से सलाह लें।

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Sources By – palpalindia.com

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