Snoring : Causes, Solution in Hindi | खर्राटे रोकने के दवा और उपाय


Snoring : Causes, Solution in हिंदी (खर्राटा) सोते समय खर्राटे लेने की समस्या सामान्य हो जा रही है। खर्राटे लेने वाले को भले ही कुछ न पता चलता हो लेकिन उसके साथ सोने वाले की तो नींद खराब होती ही है। चलिए आज हम आपको एक चौकाने वाला तथ्य बता दे, सोते समय खर्राटे लेने की समस्या सामान्य न होकर यह एक sleeping disorder का हिस्सा भी हो सकता है। खर्राटे हेल्थ संबंधी परेशानियों की ओर इशारा करते हैं, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। खर्राटों का शारीरिक बनावट से कोई लेना-देना नहीं होता। अक्सर हमें लगता है कि, उंचे खर्राटे एक मोटी गर्दन वाला मोटा व्यक्ति ही मार सकता है, लेकिन एक छोटा और पतला आदमी जिसकी गर्दन पतली हो, वह भी उतने ही उंचे खर्राटे मार सकता है। सामान्य रूप से, जैसे उम्र और वजन बढ़ता जाता है खर्राटें मारने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है, कि कुल व्यस्क लोगों की आबादी में से 20 प्रतिशत लोग खर्राटों से प्रभावित हैं। जिनमें से 60 प्रतिशत लोग 40 साल से ऊपर की उम्र वाले होते हैं।



Snoring : Causes, Solution in Hindi

खर्राटों का इलाज समय पर न किया जाए तो यह स्लीप एप्निया की वजह बन सकता है। स्लीप एप्निया के दौरान रक्त के ऑक्सीजन स्तर में अचानक कमी आना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और कार्डियो-वैस्क्युलर सिस्टम पर दबाव बढ़ना सरीखी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इस रोग से ग्रस्त कई लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, जिससे हृदय संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। स्लीप एप्निया जितना गंभीर होगा, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल का दौरा पड़ना, हृदय की धड़कन रुक जाना और स्ट्रोक होने का जोखिम उतना ही बढ़ जाता है। आइये खर्राटा क्या है, खर्राटा आने के कारण तथा खर्राटे रोकने के उपायों के बारे में विस्तार से जाने।

खर्राटा क्या है | What is Snoring in Hindi

खर्राटा नींद से संबंधित एक समस्या है, खर्राटों की आवाज नाक या मुंह, किसी से भी आ सकती है। यह आवाज सोने के बाद किसी भी समय शुरू और बंद हो सकती हैं। खर्राटे सांस अंदर लेते समय आते हैं। अधिकांश मामलों में लोगों को खुद पता नहीं होता कि वे खर्राटे मारते हैं। जो व्यक्ति खर्राटे मारते हैं, उन्हें नींद से जागने के बाद सूखा मुंह और गले में जलन का एहसास हो सकता है।

खर्राटे एक तरह की ध्वनि होती है ये तब उत्पन्न होती है, जब व्यक्ति नींद के दौरान अपनी नाक और गले के माध्यम से स्वतंत्र रूप से हवा नहीं ले पाता है। यह आसपास के ऊतकों के कांपने से बनती है। जो लोग अक्सर बहुत ज्यादा खर्राटे लेते हैं उनके गले और नाक के ऊतक में बहुत ज्यादा कंपन होता है। इसके अलावा व्यक्ति की जीभ की स्थिति भी सांस लेने के रास्ते में आ सकती है। खर्राटे की आवाज तब पैदा होती है, जब हवा का बहाव गले की त्वचा में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा कर देता है।




खर्राटा लेने के कारण | Reason of Snoring in Hindi

खर्राटा मारने की कई वजह हो सकती है जिनमे निचे दिए कुछ कारण प्रमुख है….

i) नाक के वायुमार्ग में रूकावट – नाक में विकृति होना जैसे सैप्टम (नाक के रास्ते को दो भागों में बांटने वाली दीवार) का टेढ़ापन या नाक के अंदर निकले छोटे-छोटे कणों के कारण भी वायुमार्ग में रुकावटें आ सकती हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को खर्राटे सर्दी के दिनों में या साइनस में संक्रमण के दौरान भी आते हैं।

ii) मांसपेशियों की कमजोरी – गले और जीभ की मांसपेशियां जब बहुत शांत और शिथिल हो जाएं, तो इनकी मांसपेशियां रास्ते में लटकने लग जाती हैं और रास्ता रूक जाता है। आम तौर पर यह गहरी नींद, अधिक एल्कोहॉल सेवन या नींद की गोलियां लेने के कारण होता है। उम्र के बढ़ने से मांसपेशियों का सुस्त हो जाना भी एक साधारण बात है।

iii) सोने की मुद्रा – कई बार लोग पीठ के बल सोते हैं, जिससे जीभ पीछे की तरफ हो जाती है। तालू के पीछे यूव्यल (अलिजिह्वा – तालू के पीछे थोड़ा-सा लटका हुआ मांस) पर जाकर लग जाती है, जिससे सांस लेने और छोड़ने में रुकावट आने लग जाती है। इससे सांस के साथ आवाज और वाइब्रेशन होने लगता है।

iv) पैलेट या यूव्यूला (uvula) का आकार बढ़ना और नरम होना –हमारे गले के बीच में लटक रहे ऊतक को, यूव्यूला टीश्यू कहते हैं। यूव्यूला या तलुए का आकार ज्यादा बढ़ने से नाक से गले में खुलने वाला रास्ता बंद हो सकता है। हवा के संपर्क में आकर यूव्यूला में थर्थराहट उत्पन्न होती हैं जिससे खर्राटे की समस्या उत्पन हो जाती है।

v) शराब, धूम्रपान, और दवाएं – शराब का सेवन, धूम्रपान, और कुछ दवाएं जैसे कि- lorazepam (Ativan) और diazepam (Valium) आदि, मांसपेशियों को बढ़ा सकते है जिससे खर्राटे की समस्या को बढ़ावा मिलता है।

vi) गले के ऊतकों में भारीपन – गले को ऊतकों का आकार बढ़ जाना अक्सर मोटापे के कारण होता है। कई बार वे बच्चे जिनके टॉन्सिल (tonsils) या एंडीनोइड्स (adenoids) का आकार बड़ा हो जाता है उनको भी खर्राटे मारने की परेशानियां होने लगती हैं।

vii) शरीर का आकार – संकीर्ण गला, खण्‍डतालु, बढ़े हुए कंठशूल, और अन्य भौतिक गुण खर्राटों के लिए जिम्मेदार होते है| इसके पीछे का कारण ज्यादातर अनुवांशिक होता है|

Symptoms of Snoring in Hindi | खर्राटा लेने के लक्षण

i) तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना
ii) थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ सेकेंड के लिए सांस का रुकना
iii) धीरे-धीरे सांस रुकने की रफ्तार और समय बढ़ना
iv) सोते-सोते सांस न आने पर हड़बड़ा कर जागना
v) पूरा दिन सुस्त और आलस से भरे रहना
vi) नींद पूरी होने पर भी दिनभर नींद आना
vii) थकान महसूस होना



Health Risk and Side Effect of Snoring in Hindi | खर्राटा के दुष्टप्रभाव

i) ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना – सांस लेने में बार-बार रुकावट होने पर शरीर में ऑक्सिजन का लेवल कम हो जाता है, जिससे बीपी बढ़ जाता है।

ii) हार्ट अटैक – शरीर में ऑक्सिजन कम होते ही दिल को ऑक्सिजन के लिए ज्यादा प्रेशर लगाना पड़ता है। जब यह समस्या बढ़ जाती है तो हार्ट अटैक हो सकता है।

iii) स्ट्रोक का खतरा – कई बार खर्राटों की समस्या दिमाग पर भी असर डालती है। शरीर में ऑक्सिजन की मात्रा कम होने और कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से दिमाग पर बेवजह दबाव बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक्स की आशंका काफी बढ़ जाती है।

iv) फेफड़ों पर असर – नाक में रुकावट होने पर जब कोई शख्स मुंह खोलकर सोता है तो बिना छनी हवा मुंह के रास्ते व्यक्ति के अंदर जाती है, जिससे फेफड़ों को नुकसान होता है।

v) आलस और थकान – रात को नींद पूरी न होने पर दिन भर आलस और थकान महसूस होती है, जिससे उसका मन भटकता रहता है। चिड़चिड़ापन और नाखुशी भी नजर आती है।

vi) मोटापे की आशंका – सात घंटे की नींद पूरी न होने पर व्यक्ति के हॉर्मोन्स पर असर पड़ता है। इससे उसका वजन बढ़ना शुरु हो जाता है। वजन बढ़ने से और ज्यादा खर्राटे आने लगते हैं। ये दोनों चीजे एक-दूसरे से ही जुड़ी होती हैं।

Solution of Snoring in Hindi | खर्राटा से बचने के उपाय

i) पीठ के बल सोने की बजाय करवट लेकर सोएं। इससे सांस की नली में रुकावट नहीं होती।
ii) सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोएं। इससे आपकी जीभ और सांस की नली में रुकावट नहीं आएगी।
iii) रात के समय हल्का खाना खाएं।
iv) अगर मोटापा है तो वजन कंट्रोल करें। नियमित योग और एक्सरसाइज करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।
v) एल्कोहॉल और अन्य नशीली दवाओं के सेवन से बचें
vi) नेजल स्ट्रिप एक चिपकने वाली पट्टी होती है इसको खर्राटों पर नियंत्रण पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नेजल स्ट्रिप की मदद से नाक के अंदर की जगह खुल जाती है और हवा में कोई रुकावट नहीं होती।

Snoring Treatment in Hindi | खर्राटा का घरेलू इलाज

i) अच्छी नींद लाने तथा खर्राटे बंद करने के लिए :रात को गाय का घी हलका–सा गरम करके १ से ४ बुंद दोनों नथुनों में डाले |
ii) हल्दी में एंटी-सेप्ट‍िक और एंटी-बायोटिक गुण होते हैं. इसके इस्तेमाल से नासा-द्वार साफ हो जाता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है. रोज रात को सोने से पहले दूध में हल्दी पकाकर (हल्दी वाला दूध) पीने से फायदा होगा.
iii) लहसुन को सरसों के तेल को गर्म करके गले एवं छाती की मालिस करने से स्वांस लेने में होने वाली रुकावट दूर होती है | रोजाना सोने से पहले उसके गर्म तेल से अपनी छाती एवं गर्दन की massage करे |
iv) रोजाना शाहद के इस्तेमाल से गले में होने वाली तकलीफ दूर होती है | रोजाना 2 से 3 बार एक चम्मच शहद का सेवन करे | सोने से पहले एक चम्मच शहद जरुर ले |
v) ठन्डे पानी के कारण या कोई भी ठंडी चीज जैसे सीतल पेय, कुल्फी, आइसक्रीम अदि का इस्तेमाल से हमारे गले में सिकुड़न होने लगता है, अत इन सब चीजो का सेवन कम कर दे।
vi) नहाने से बाद और सोने से पहले नाक में सरसों के तेल की 2-3 बूंदें डाल लें। इससे खर्राटों को रोका जा सकता है।
vii) एक गिलास पानी में पुदीना के तेल की एक -दो बूंदे मिलाये। सोने से पहले इससे गरारे करें। ये सुनिश्चित करले की यह मिश्रण आप निगल ना लें।
viii) सोने से पहले पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर उससे गरारे कर लें। इस उपाय को कुछ दिन तक करते रहें।
ix) पुदीने में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गले और नासाछिद्रों की सूजन को कम करने का काम करते हैं। इससे सांस लेना आसान हो जाता है।
x) ऑलिव ऑयल एक बहुत कारगर घरेलू उपाय है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह श्वसन तंत्र की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में बहुत फायदेमंद होता है।
xi) इलायची, श्वसन तंत्र को खोलने का काम करती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया सुगम होती है. सोने से पहले इलायची के कुछ दानों को गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पीने से समस्या में राहत मिलेगी।

Snoring Treatment In Homeopathy | खर्राटा से बचने के लिए होमियोपैथी दवा

i) लेम्ना माइनर 1x,3,30 – नाक में रुकावट के कारण खर्राटे आने पर उपयोगी है | सामान्यतः खर्राटे आने पर इसी दवा का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है और इससे बहुत लाभ होता देखा गया है ।

ii) ओपियम 30,200 – मुख तथा नाक के भीतरी भाग के शिथिल पड़ जाने के कारण खर्राटे आने लगें तथा श्वास में खड़खड़ाहट की आवाज भी आये तो उपयोगी है ।

iii) हिपोजिनियम 30,200 – नाक के सड़े हुये जख्मों अथवा नाक के पुराने शोथ के कारण खर्राटे आने पर उपयोगी है ।

Snoring related exercise and Yogasan | खर्राटा से बचने के लिए व्यायाम और योगासन

खर्राटों की समस्या से बचने के लिए आप योग का सहारा ले सकते हैं। कपालभाति और उज्जई प्राणायाम खर्राटों में लाभकर है। इसके साथ आप अनुलोम विलोम प्राणायाम भी कर सकते हैं।
खर्राटा से बचने के लिए गले की मांसपेशियों की एक्‍सरसाइज करना लाभकारी साबित हो सकता है ।

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Reference From
hi.wikipedia.org

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