Sinus: Symptoms, causes, and treatment in Hindi | साइनस का घरेलू उपचार


Sinus: Symptoms, causes, and treatment in Hindi, साइनस दूषित वातावरण और खराब जीवनशैली से उत्पन होने वाली नाक से जुड़ी एक स्वास्थय समस्या है। इसे आयुर्वेद में प्रतिश्याय नाम से भी जाना जाता है। सबसे पहले हमे यह जानना जरूरी है कि साइनस क्या है? दरअसल, हमारी खोपड़ी में बहुत-सारी कैविटीज़ (खोखले छेद) होती हैं। ये हमारे सिर को हल्का बनाए रखने और सांस लेने में मदद करती हैं। इन छेदों को साइनस कहते हैं। श्वास लेने के दौरान अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकने का काम करती है।



Sinusitis: Symptoms, causes, and treatment in Hindi

साइनस संक्रमण से भारत में लग-भग एक-चैथाई लोग ग्रसित हैं। यह बीमारी आम तौर पर सर्दी के रूप में शुरू होती है और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के साथ बढ़ जाती है। साइनस के रोगी को, किसी चीज को ध्यान से देखने, आगे झुकने, लेटने और चेहरे या नाक पर किसी प्रकार का दबाव पड़ने से और भी ज्यादा तकलीफ़ होती है। कभी-कभी यह समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि इसके कारण, ऊपरी दांत में भी दर्द होने लगता है। साइनस की समस्या में रोगी को सांस लेने में भी तकलीफ होती है। आज हम आपको साइनस होने के कारण, साइनस से जुड़े लक्षण, साइनस के घरलू उपचार के बारे में विस्तार पूर्वक जानेगे…..

साइनोसाइटिस व साइनस क्या है | Sinusitis or Sinus details in hindi

साइनोसाइटिस नाक से जुड़ा एक संक्रमण है। नाक के भीतरी आस-पास के छिद्रों में संक्रमण की वजह से सूजन आ जाती है। आम तौर पर, नाक के भीतरी आस-पास के हिस्सों में जो छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें साइनस गुहा कहा जाता है, हवा से भरे होते हैं; लेकिन यदि इन छिद्रों में हवा के बजाय, तरल,बलगम और संक्रामक तत्वों से भर जाए तो यह ब्लॉक हो जाते हैं, जिसकी वजह से रोगी के माथे, आँखों, नाक और नाक के आस-पास के हिस्से (चेहरे) पर दबाव बना रहता है और वहां दर्द रहता है।
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Types of Sinusitis or Sinus in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस के प्रकार

i) तीव्र साइनोसाइटिस (Acute Sinusitis) :- इस प्रकार में लक्षण अचानक शुरू होकर 2 से 4 हफ़्तों तक तकलीफ रहती हैं।
ii) मध्यम तीव्र साइनोसाइटिस (Sub Acute Sinusitis) :- इस प्रकार में साइनस में सूजन 4 से 12 हफ़्तों तक रहती हैं।
iii) जीर्ण साइनोसाइटिस (Chronic Sinusitis) :- इस प्रकार में लक्षण 12 हफ़्तों से अधिक समय तक रहता हैं।
iv) आवर्तक साइनोसाइटिस (Recurrent Sinusitis) :- इस प्रकार में रोगी को सालभर बार – बार साइनोसाइटिस की समस्या निर्माण होती हैं।




Sinusitis or Sinus causes in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस होने के कारण

i) कफ और वात दोष का असंतुलन – अगर आप बहुत ज्यादा ठंडी, भारी और सूखे पदार्थ का सेवन करते है तो आपके शरीर में वात और कफ का संतुलन बिगड़ जाता हैं। जिसकी वजह से शरीर में अधिक बलगम का संचय होने लगता हैं जिसकी वजह से नाक के भीतरी आस-पास के छिद्रों में संक्रमण की वजह से सूजन आ जाती है। इसलिए ठंडी चीजे -पेय पदार्थ और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
ii) फंगस, वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण – हमलोग दूषित वातावरण में जी रहे हैं। यहाँ पानी से लेकर हवा सभी चीजे दूषित हो रखी हैं। न चाहते हुवे भी हम साँस के माध्यम से फंगस, वायरस और बैक्टीरिया संग्रहित हवा के सेवन करने को मजबूर हैं। इन सभी दूषित चीजों की वजह से साइनस में सूजन उत्पन हो सकती हैं । नाक में फोड़ा होना तथा एलर्जी इस रोग का मुख्य कारण है। जानवरों की गोबर, धुंआ व प्रदूषण भी इस रोग का कारण है। मौसम परिवर्तन, दूषित पानी से नहाने, सांसनली के ऊपर के भाग में संक्रमण के दौराना वायुयान से यात्रा करने एवं टांसिल प्रदाह आदि इस रोग का कारण है।
iii) साइनस होने की एक मुख्य वजह नाक की हड्डी का टेढ़ा होना भी हो सकता हैं।
iv) अक्सर नाक के अंदर मांस बढ़ जाता है जिसे पॉलिप कहते है। इसकी वजह से भी साइनस की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं ।
v) इसके अलावा पाचन तंत्र की गड़बड़ी, तनाव, और सांस संबधी अन्य शारीरिक समस्याओ के कारण भी साइनस हो सकता हैं ।

Symptoms of Sinusitis or Sinus in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस के लक्षण

i) सिरदर्द, सर आगे झुकाने या लेटने पर सिरदर्द बढ़ जाना
ii) नाक से सफ़ेद, हरा या पिला कफ निकलना
iii) कफ व बलगम से नाक बंद होना या नाक बहना
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iv) सूंघने और स्वाद की शक्ति कमजोर होना
v) चेहरे पर सूजन
vi) हल्का बुखार और गले में दर्द रहना
vii) चेहरा भाड़ी लगना तथा आँखों के आस-पास दबाव महसूस होना

Sinusitis or Sinus Home Remedies in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस का घरेलू इलाज

i) कमल जड़, अदरक, और आटा मिलाकर लेप बनाएं-इस लेप को रात में सोने से पहले नाक और माथे पर लगाएं-सुबह होते ही उसे गर्म पानी से धो लें
ii) सहजन की फली का सूप, लहसुन, प्याज, काली मिर्च और अदरक डालकर बनाएं- इस सूप को गर्मा गर्म पीने से बहुत लाभ होता है
iii) भाप लेने से बंद नाक खुलती है और बलगम कम होता है। साथ ही, यह साइनस प्रेशर और सिरदर्द कम करने में भी मदद करती है।
iv) हल्दी में एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और एंटी-इन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं जो साइनस इन्फेक्शन और अत्यधिक बलगम के जमाव को ठीक करने में मदद करती हैं। इसमें curcumin नामक एक्टिव कंपाउंड पाया जाता है जो साइनस कैविटी में सूजन को कम करता है और वायुमार्ग को आसान बनाता है।
v) अजवाइन की पत्तियों के तेल में एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। साथ ही, एक एंटी-इन्फ्लामेट्री एजेंट होने के कारण यह इन्फ्लामेशन को कम करता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट भी होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। डेढ़ कप उबलते पानी में दो बूंदे तेल की डालकर वाष्प को लें। इससे बलगम साफ होगा और बंद नाक खुल जाएगी। इस उपचार को रोज करें।
vi) अदरक में एंटीवायरल, एंटीबायोटिक और एंटी-इन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं जो साइनस इन्फेक्शन को ठीक करने में मदद करती हैं। अदरक में polyphenols पाए जाते हैं जो बलगम के स्राव को कम करके नार्मल स्टेज में ले आते हैं। साथ ही, यह नाक में सिलिया की मात्रा को बढ़ाते हैं। सिलिया नाक के अन्दर मौजूद बालों जैसे ढांचे होते हैं जो एलर्जी वाले कणों को फिल्टर करके साइनस इन्फेक्शन से बचाते हैं।
vii) सेब के सिरका में एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं जो साइनस इन्फेक्शन को ठीक करने में मदद करती हैं। सर्दी-जुकाम, फ्लू या एलर्जी होने पर सेब के सिरका का सेवन करने से साइनस इन्फेक्शन को बनने से रोका जा सकता है। एक कप गर्म पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। अब इसमें एक चम्मच शहद मिला लें और सेवन करें।
viii) अपने भोजन में विटामिन-ई से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें-साबुत अनाज, बादाम, काजू, अंडे, पिस्ता और अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, शकरकंद, सरसों, और पॉपकार्न ऐसे ही खाद्य पदार्थ हैं जिनमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है

Sinusitis or Sinus Ayurvedic Remedies in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस का आयुर्वेदिक इलाज

i) अणु तेल – अणु तेल साइनसाइटिस के उपचार के लिए आयुर्वेद की एक औषधी है यह तेल संकुलन को कम करने के लिए जाना जाता है- नाक बंद हो जाने पर यह तेल काफी असरदार होता है-हालांकि शुरू में कुछ समय आप लगातार छींकेंगे और नाक भी बहेगी, पर कुछ दिन बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।
ii) जीवनधारा – भांप को सूंघते समय इस दवाई को मिलाया जाता है-अगर एक हफ्ते तक दिन में दो बार इसकी सांस लेंगे तो काफी फायदा पहुंचेगा।
iii) हल्का गर्म महानारायण या तिल तेल से साइनस स्थान पर दिन में 2 से 3 बार मालिश करने से साइनस में लाभ होता हैं। आधे चम्मच मधुयस्ती चूर्ण को आधे चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम एक हफ्ते तक लेंने से साइनस में आराम मिलता हैं।
iv) खदीरादी वटी – साइनस इंफैक्शन के जलन को कम करने के लिए खदीरादी वटी का उपयोग किया जाता हैं। इसके अलावा कांचनार गुग्गुल और व्योषादि वटी का इस्तेमाल भी इसी उद्देश्य के लिए किया जाता है।
v) 1 चम्मच सितोपलादि और आधा चम्मच तालीसादि चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम गरम पानी से एक हफ्ते लेंने से साइनस में आराम मिलता हैं ।
vi) सोने से पहले नाक में गाय के घी की दो-दो बूंदें तीन दिन तक डालें। पिघले घी को ही नाक में डालें।

Sinusitis or Sinus Homeopathic Remedies in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस का होम्योपैथी इलाज

होम्योपैथी में साइनस के इलाज के लिए इस तरह की दवाएं दी जाती हैं जिनसे सिरदर्द में आराम मिले और कैविटी में भरा बलगम जुकाम के जरिए बाहर निकले। ये दवाएं हैं:
नोट: ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक है अतः दवा डॉक्टर से पूछे बिना कतई न लें।

i) कली बिक्रोमियम (Kali bichromicum) 30: 5-5 गोली दिन में तीन बार
ii) आर्सेनिकम अल्बम (Arsenicum Album) 30: 5-5 गोली दिन में तीन बार
iii) सिलैसिआ (Silicea) 30: 5-5 गोली दिन में तीन बार
iv) सैम्बुकस निग्रा (Sambucus Nigra) 30: 5-5 गोली दिन में तीन बार

Yogaasan for Sinusitis or Sinus in Hindi | साइनोसाइटिस व साइनस के लिए योगासन

i) सुबह उठकर 1 से 2 मिनट जल नेति
ii) कुंजल क्रिया 2 से 5 मिनट
iii) कपालभाति 5 से 7 मिनट
iv) महावीर आसन 2 से 3 बार
v) वीर आसन 2 से 3 बार
vi) पृष्ठचालन आसन 2 से 3 बार
vii) शलभासन 2 से 3 बार
viii) धनुर्रासन 2 से 3 बार
ix) मंडूकासन 2 से 3 बार
x) अनुलोम-विलोम प्राणायाम 2 से 5 मिनट
xi) भस्त्रिका प्राणायाम 2 से 5 मिनट
xii) इसके बाद 2 से 5 मिनट ध्यान में बैठें या 2 से 5 मिनट तक शवासन करें।

नोट: ये सभी योग क्रियाएं सुबह खाली पेट करें और शाम को करना चाहिए और बिना किसी एक्सपर्ट के ना करें।

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Reference From
navbharattimes.indiatimes.com

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