Scrub typhus : Causes, Symptoms and Treatment in Hindi | स्क्रब टाइफस


Scrub typhus (स्क्रब टाइफस) एक तरह का तीव्र बुखार और संक्रामक बिमारी है , मौसम खुलने और उमस बढ़ने से घास में पैदा होने वाले पिस्सु अपना असर दिखाने लगे हैं। घास में पैदा होने वाले इन पिस्सुओं के काटने से लोग सक्रब टाइफस की चपेट में आ रहे हैं। अगस्त और सितम्बर माह में यह बीमारी भारत और नेपाल के पहाड़ी इलाकों में खास तौर से घने जंगल वाले उन इलाकों में फैलती है जहाँ गन्दगी होती है. इस बीमारी को सबसे पहले 1930 में जापान में पहचाना गया. जो समय समय पर दुनिया के अनेक पहाड़ी इलाकों में अनेक रूप धारण कर फैलता रहा. वैसे तो यह उतना खतरकनाक नहीं है, लेकिन अगर समय रहते इसका उचित रोकथाम और इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी हो सकता हैं । 28-sept-2016 को हिमाचल में इससे पीड़ित 20 लोग अपनी जान गवा चुके है । इसलिए लापरवाही कतई न बरते और हमारे द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशो का उचित रूप से पालन करे




What is Scrub typhus | स्क्रब टाइफस क्या है

यह बीमारी ज्यादातर जलजमाव वाली जगहो में पनपने वाले परजीवी ओरिएंटा सुसुगामुशी नामक कीट के काटने से होता है, इसके अलावा पिस्सुओं के काटने से भी इसका संक्रमण हो सकता है। यह परजीवी लेप्टोट्रांबिडियम आकामुशी प्रजाति के होते है । यह परजीवी ज्यादातर पहाड़ी इलाके, घनी जंगली इलाके और खेतों के आस-पास पाए जाते हैं। लेकिन बारिश और सर्दियों में जंगली पौधे या घने घास के आस-पास किसी भी क्षेत्र में इन कीटो को आसानी से देखा जा सकता है ।

Causes of Scrub typhus in Hindi| स्क्रब टाइफस कैसे फैलता है

ओरिएंटा सुसुगामुशी और पिस्सुओं काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है । इसकी वजह से मनुष्य के लिवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं । यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोगी के इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। यहाँ तक की विकट परिस्थितयो में मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में भी पहुंच जाता है।




Symptoms of Scrub typhus in Hindi । स्क्रब टाइफस के लक्षण

स्क्रब टाइफस के लक्षण रोगियों में कई तरीके से देखे जा सकते है जैसे की —
➥ यह परजीवी जहाँ काटते है वहाँ फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान बन जाता है
➥ मरीज को तेज बुखार जिसका तापक्रम (40-40.5°C [104-105°F]) अधिकाशतः पाया गया है
➥ मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है
➥ जी मिचलाना भूख न लगना, खाने की इच्छा में कमी, पेट ख़राब होना हो सकता है
➥ गंभीर अवस्था में रोगी के प्लेटलेट्स की संख्या भी कमी आने लगती है

उपरोक्त लक्षण किसी भी तरह से यह कतई नहीं सत्यापित करते है आप Scrub typhus fever से ग्रषित है, इसलिए किसी भी तरह के उपरोक्त लक्षण दिखने पर चिकित्सक के पास जाकर Scrub typhus fever के लक्षण का संदेह व्यक्त करे और चिकित्शक के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशो का पालन करे

Scrub typhus Precaution in Hindi । स्क्रब टाइफस से जुडी सावधानियॉ

➥ एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाये जाता है
➥ बरसात के दिनों में जंगली पौधे खुद व खुद उगने लगते है इसलिए घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें। और समय समय पर सफाई करते रहे
➥ घास या झाड़ियो में अगर आप जाते हो तो जूते और ग्लब्स इत्यादि का उपयोग जरूर करे
➥ ऐशे कपडे का उपयोग करे जिससे आपका शरीर अच्छी तरीके से ढका रहे
➥ आस-पास जलजमाव बिलकुल भी न होने दे
➥ डी. डी .टी. जैसी कीटनाशकों का छिडकाव बीच बीच में करवाते रहे
➥ अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।
➥ अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरन्त चिकत्सक से मिले और रक्तजाच जरूर करा लें ।

Scrub typhus Treatment in Hindi | स्क्रब टाइफस का उपचार

➥ इसका इलाज एंटी रिकेटसियल दवाओं से होता है।
➥ डाक्सीसाइक्लीन टेबलेट का भी उपयोग किया जाता है ।

Home Treatment of Scrub typhus fever | स्क्रब टाइफस बुखार के घरेलू उपचार

➥हल्दी :- हल्दी में मेटाबालिज्म बढ़ाने का गुण होता है, यह दर्द और घाव को जल्दी ठीक करने में भी उपयोगी होता है । हल्दी का सेवन दूध में मिलाकर किया जा सकता है।

➥मेथी के पत्ते :- इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर, छानकर पानी को पीया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं। यह पत्तियां बुखार कम करने में सहायता करती है ।

➥ एप्सम साल्ट (Epsom salt) :- एप्सम साल्ट की कुछ मात्रा गरम पानी में डालकर उस पानी से स्नान करे । इस पानी में नीम की पत्तियां भी मिलाएं। ऐसा करने से भी दर्द से राहत मिलेगी और तापमान नियंत्रित होगा।

➥ लहसुन और सजवायन की फली (Garlic and drum stick):- किसी भी तेल में लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करें और इस तेल से रोगी की मालिश करें। इसके सेवन से दर्द में काफी आराम मिलता है

➥गिलोय :- गिलोय के तनों को तुलसी के पत्ते के साथ उबालकर डेंगू पीड़ित व्यक्ति को देना चाहिए । यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।




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