Paralysis : Causes, Symptoms, Treatment in Hindi | पैरालिसिस, लकवा, पक्षाघात क्या है


Paralysis : Causes, Symptoms, Treatment in Hindi, पैरालिसिस जिसको हम कई नामों से जैसे, लकवा मारना, फालीज मारना, पक्षाघात, अधरंग, ब्रेन अटैक या ब्रेन स्ट्रोक के नाम से भी जाना जाता है। Paralysis स्वास्थय से जुड़ी काफी गंभीर समस्या हैं। सही जानकारी के अभाव में और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण लगभग एक तिहाई लोगो को इस बीमारी में शरीर का कोई हिस्सा या आधा शरीर निष्क्रिय व चेतनाहीन होने लगता है या तो मौत की चपेट में आ जाते हैं। निष्क्रिय होने की वजह से अनचाहे दूसरे लोगों पर आश्रित होना पड़ जाता हैं। लेकिन वक्त पर सही इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं और पहले की तरह ही नॉर्मल जिंदगी जीने लगते हैं।



Paralysis : Causes, Symptoms, Treatment in Hindi

दिमाग हमारे शरीर का सबसे अहम हिस्सा है और पैरालिसिस का सीधा संबंध दिमाग से है। दरअसल शरीर के सभी अंगों और कामकाज का नियंत्रण दिमाग से होता है। बोलने, चलने-फिरने, देखने जैसे सभी काम दिमाग से ही कंट्रोल होते हैं। जब दिमाग की खून की नलियों में कोई खराबी आ जाती है तो ब्रेन स्ट्रोक होता है, जो पैरालिसिस की वजह बनता है। इस लेख के माध्यम से आज हम आपको Paralysis के बारे में समुचित जानकारी देंगे – पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारने के – कारण | लक्षण | प्रकार और इलाज

What is Paralysis | Paralysis details in Hindi | पैरालिसिस क्या हैं ?

पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारना मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर बिमारी हैं। शरीर के अन्य अंगों की तरह हमारे मस्तिष्क को भी लगातार रक्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। रक्त में ऑक्सिजन तथा विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाये जाते है जो हमारे मस्तिष्क को सही रूप से कार्य करने में काफी मदद करते है। जब हमारे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रूक जाता है, तो एक या अधिक मांसपेशी या समूह की मांसपेशियाँ पूरी तरह से कार्य करने में असमर्थ हो जाती है। तब ऐसी स्थिती को पक्षाघात अथवा लकवा मारना कहते हैं।
पक्षाघात कभी भी कहीं भी तथा किसी भी शारीरिक हिस्से में हो सकता है। पैरालिसिस अचानक होता है। अक्सर पीड़ित रात में खाना खाकर ठीक-ठाक सोने जाता है। सुबह उठता है तो पता चलता है कि हाथ-पांव नहीं चल रहा। खड़े होने की कोशिश करता है तो गिर जाता है। कई बार दिन में ही काम करते या खड़े-खड़े या बैठे-बैठे अचानक पैरालिसिस हो जाता है।

नोट: दिमाग का दायां हिस्सा बाईं ओर के अंगों को कंट्रोल करता है और बायां हिस्सा दाईं ओर के अंगों को। ऐसे में अगर दिमाग के दाएं हिस्से में दिक्कत हुई है तो बाएं हाथ-पैरों पर असर पड़ेगा और बाएं में गड़बड़ी हुई है तो दाएं हाथ-पैरों पर।




Causes and Reason of Paralysis in Hindi? | पैरालिसिस के कारण

दिल से दिमाग तक चार मुख्य नलियों से खून जाता है – दो गर्दन में आगे से और दो पीछे से। अंदर जाकर ये पतली-पतली नलियों में बंट जाती हैं ताकि दिमाग के हर हिस्से में खून पहुंच सके। शरीर के दूसरे हिस्सों की तरह ही दिमाग में भी दो तरह की खून की नलियां होती हैं। एक जो दिल से दिमाग तक खून लाती हैं और दूसरी, जो दिमाग से वापस दिल तक खून लौटाती हैं। जो नलियां खून लाती हैं, उन्हें धमनी (आर्टरी) कहते हैं और जो दिमाग से वापस खून दिल तक ले जाती हैं, उन्हें शिरा (वेन) कहते हैं।
पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारने का मुख्य कारण दिमाग के अंदर रक्त प्रवाह का रूकना तथा खून ले जाने वाली आर्टरी में अगर खराबी आ जाए तो वह या तो फट जाती हैं या फिर लीक होने लगती हैं तो खून बाहर निकलकर जम जाता है। जिसे ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) कहते हैं। जैसे-जैसे खून की मात्रा बढ़ती जाती है ‘क्लॉट’ का साइज बढ़ता जाता है और जल्द ही यह खून की नली या उसके जख्म को बंद कर देता है जिससे खून का निकलना बंद हो जाता है। लेकिन बहुत-से मरीजों में तब तक इतना खून निकल चुका होता है कि सिर के अंदर दबाव बढ़ जाता है और इससे दिमाग काम करना बंद करने लगता है। इस बढ़ते दबाव की वजह से सिरदर्द या उलटी होने लगती है। ज्यादा बढ़ने पर दबाव बेहोशी, पैरालिसिस, सांस अटकने आदि का कारण बनता है। आइये Paralysis के कुछ अन्य कारणों को जाने।

1) किसी भी दुर्घटना के होने से, संक्रमण, अवरूप्ध रक्तवाहिकाओं तथा टयूमर की वजह से पक्षाघात होने की संभावना बनी रहती है।
2) जिन लोगों में उच्चरक्तचाप, मधुमेह तथा कोलेस्ट्रॉल अधिक मात्रा में पाया जाता है तो पक्षाघात होने की संभावना बनी रहती है।
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3) रीढ की हड्डी पर चोट लगने से जब मेरूदंड पर इसका प्रभाव पडता है तब ऐसी स्थिती में भी पक्षाघात हो सकता है।
4) जिन लोगों का शारीरिक वजन अधिक है, उन लोगों में स्ट्रोक होने का खतरा बना रहता है।
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5) खराब जीवनशैली, धूम्रपान या किसी भी तरह के मादक पदार्थ का सेवन इत्यादि भी लकवा मारने की मुख्य वजह बन सकती हैं।

Symptoms and Signs of Paralysis in Hindi? | पैरालिसिस के लक्षण

पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारना, पक्षाघात होने पर आम तौर पर शरीर के एक हिस्से चेतनाहीन तथा निष्क्रिय हो जाता है। पैरालिसिस का प्रभाव सिर्फ चेहरे, एक बांह, एक पैर, या शरीर और पूरे चेहरे के एक पहलू पर देखा जा सकता हैं इसके अलावा पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारना, पक्षाघात होने के कई लक्षण देखनो को मिल सकते हैं

1) शरीर में अकडन आना।
2) शरीर के एक विशेष हिस्से का बार बार सुन्न पड जाना।
3) हाथ पैर उठाने तथा चलने में परेशानी होना।
4) अत्याधिक सिरदर्द होना, चक्कर आना, कभी कभी व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है।
5) सही रूप से बात न कर पाना, बात करने में तकलीफ होना।
6) पक्षाघात होने पर इसका दुष्प्रभाव आंखों पर भी पडने लगता है। तथा उस व्यक्ति को कई बार चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं।




Types of Paralysis in Hindi? | पैरालिसिस के प्रकार

1. अर्दित : सिर्फ चेहरे पर लकवे का असर होना अर्दित यानि फेशियल पेरेलिसिस कहलाता है। इसमें सिर, नाक, होठ, ढोड़ी, माथा, आंखें तथा मुंह स्थिर होकर मुख प्रभावित होता है और स्थिर हो जाता है।
2. एकांगघात : इसे एकांगवात भी कहते हैं। इस रोग में मस्तिष्क के बाहरी भाग में समस्या होने से एक हाथ या एक पैर कड़क हो जाता है और उसमें लकवा हो जाता है। यह समस्या सुषुम्ना नाड़ी में भी हो सकती है। इस रोग को एकांगघात यानि मोनोप्लेजिया कहते हैं।
3. सर्वांगघात : इसे सर्वांगवात रोग भी कहते हैं। इस रोग में लकवे का असर शरीर के दोनों भागों पर यानी दोनों हाथ व पैरों, चेहरे और पूरे शरीर पर होता है, इसलिए इसे सर्वांगघात यानि डायप्लेजिया कहते हैं।
4. अधरांगघात : इस रोग में कमर से नीचे का भाग यानी दोनों पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं। यह रोग सुषुम्ना नाड़ी में विकृति आ जाने से होता है। यदि यह विकृति सुषुम्ना के ग्रीवा खंड में होती है, तो दोनों हाथों को भी लकवा हो सकता है। जब लकवा ‘अपर मोटर न्यूरॉन’ प्रकार का होता है, तब शरीर के दोनों भाग में लकवा होता है।
5. बाल पक्षाघात : बच्चे को होने वाला पक्षाघात एक तीव्र संक्रामक रोग है। जब एक प्रकार का विशेष कीड़ा सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कर उसे नुकसान पहुंचाता है तब सूक्ष्म नाड़ी और मांसपेशियों को आघात पहुंचता है, जिसके कारण उनके अतंर्गत आने वाली शाखा क्रियाहीन हो जाती है। इस रोग का आक्रमण अचानक होता है और यह ज्यादातर 6-7 माह की आयु से ले कर 3-4 वर्ष की आयु के बीच बच्चों को होता है।

Preservation from paralysis in Hindi | पैरालिसिस से बचाव

i) नियमित रूप से एक्सरसाइज और प्राणायाम करें। रोजाना कम-से-कम तीन से चार किमी ब्रिस्क वॉक करें। 10 मिनट में एक किलोमीटर की रफ्तार से 30-40 मिनट रोज चलें। साइक्लिंग, स्वीमिंग, जॉगिंग भी बढ़िया एक्सरसाइज हैं।
ii) वजन कंट्रोल में रखें। 18 से कम और 25 से ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई (BMI) न हो। कोई बीमारी न हो तो भी 40 की उम्र के बाद ज्यादा नमक और फैट वाली चीजें कम खाएं। ‌
iii) 20-25 साल की उम्र से ही नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराएं। डॉक्टर की सलाह पर खाने में परहेज करें और एक्सरसाइज बढ़ाएं।
iv) ब्लड प्रेशर 120/ 80 है तो अच्छा है। ज्यादा है तो 135/85 से कम लाना लक्ष्य होना चाहिए।
v) अगर ब्लड प्रेशर की कोई दवा लेते हैं तो उसे नियमित रूप से लें। ब्लड प्रेशर ठीक जो जाए, तब भी डॉक्टर की सलाह पर दवा लेते रहें।
vi) 35-40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार शुगर और कॉलेस्ट्रॉल की जांच जरूर कराएं।
vii) नमक कम-से-कम खाना चाहिए। सलाद, रायता आदि में नमक न डालें। पैकेज्ड फूड या अचार न लें क्योंकि इनमें नमक अधिक होता है।
viii) ज्यादा-से-ज्यादा ताजे फल और हरी सब्जियां खाएं।
ix) पानी खून के बहाव को बढ़ाता है इसलिए रोजाना कम-से-कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
x) महीने में एक शख्स को आधा किलो से ज्यादा घी-तेल नहीं खाना चाहिए।

Home remedies and treatment for paralysis in Hindi | पैरालिसिस का घरेलू इलाज

पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारना, पक्षाघात एक गंभीर रोग है और इसकी चिकित्सा किसी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से ही कराई जानी चाहिए। इस रोग के प्रभाव को कम करने में सहायक घरेलू नुस्खे प्रस्तुत हैं। ले‍कि‍न यह सम्पूर्ण चिकित्सा करने वाला सिद्ध हो, यह जरूरी नहीं।

1. 250 ग्राम रिफाइन्ड तेल में 50 से 60 ग्राम काली मिर्च मिलाकर कुछ देर तक पकायें। अब इस तेल से लकवे से प्रभावित अंग पर हल्के हल्के हाथों से लगायें। इस तेल को उसी समय बनाकर गुनगुना करके लगायें। इस इलाज को लगभग एक महीने तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।
2. उड़द, कौंच के छिलकारहित बीज, एरण्डमूल और अति बला, सब 100-100 ग्राम ले कर मोटा-मोटा कूटकर एक डिब्बे में भरकर रख लें। दो गिलास पानी में 6 चम्मच चूर्ण डालकर उबालें। जब पानी आधा गिलास बचे तब उतारकर छान लें और रोगी को पिला दें। यह काढ़ा सुबह व शाम को खाली पेट पिलाएं।
3. पक्षाघात के लिए 4 से 5 लहसुन की कलियों को पीसकर उसे 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाट लें। इसके अलावा लहसुन की 4 से 5 कलियों को दूध में उबालकर उसका सेवन करने से रक्तचाप भी ठीक रहता है तथा लकवा से ग्रसित अंगों में भी हलचल होने लगती है।
4. तुम्बे के बीजों को पानी में पीसकर लकवाग्रस्त अंग पर लेप करने से लाभ होता है।
5. सौंठ और सेंधा नमक बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को नकसीर की भांति दिन में 2-3 बार सूंघने से लाभ होता है।
6. लकवाग्रस्त रोगी के लिए गाय या बकरी का दूध व घी, पुराना चावल, गेहूं, तिल, परवल, सहिजन की फली, लहसुन, उड़द या मूंग की दाल, पका अनार, खजूर, मुनक्का, अंजीर, आम, फालसा आदि का सेवन करना, तेल मालिश करना और गर्म जल से स्नान करना व गर्म पानी पीना पथ्य यानि फायदेमंद है।
7. देसी गाय के शुद्ध घी की 3 बूदों को हर रोज सुबह शाम नाक में डालने से माइग्रेन की समस्या खत्म हो जाती है। बाल झडना बंद हो जाते हैं तथा लकवा मारने के इलाज में भी बहुत फायदा होता है।
8. सोंठ तथा उडद को पानी में मिलाकर हल्की आंच पर गर्म करके नियमित रूप से यह पानी रोगी को पिलाने से पक्षाघात में काफी लाभ पहुँचता है।

Ayurvedic remedies for paralysis in Hindi | पैरालिसिस का आयुर्वेदिक इलाज

पैरालिसिस, लकवा मारना, फालीज मारना, पक्षाघात से रिकवरी के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म थेरपी, रसराज रस, समीरपन्नग रस, एकांगवीर रस, वृहत् वात चिंतामणि रस, दशमूल तैल, महाविषगर्भ तैल आदि लाभकारी हैं।

1. कलौंजी के तेल से लकवे वाली जगह पर मालिश करें।
2. बला मूल (जड़) का काढ़ा सुबह-शाम पीने से आराम होता है।
3. कुचलादि वटी- शुद्ध कुचला 10 ग्राम, खरल में डालकर इसमें आवश्यक मात्रा में पानी डालकर अच्छी तरह घुटाई करें। जब महीन घुट जाए तब इसकी 1-1 रत्ती की गोलियां बना लें और छाया में सुखा लें। सुबह-शाम 1-1 गोली बने हुए सादे पान में रखकर एक माह तक सेवन करने से इस रोग में लाभ होता है।
4. रसराज रस व वृहत वात चिंतामणि रस 5-5 ग्राम, एकांगीवीर रस, वात गजांकुश रस, पीपल 64 प्रहरी, तीनों 10-10 ग्राम। सबको मिलाकर पीसकर एकजान कर लें। इनकी 60 पुड़िया बना लें। सुबह-शाम 1-1 पुड़िया शहद के साथ एक माह सेवन करें।
इसके एक घंटे बाद रास्नाशल्लकी वटी व महायोगराज गूगल स्वर्णयुक्त 2-2 गोली दूध के साथ लें। भोजन के बाद, दोनों वक्त, महारास्नादि काढ़ा और दशमूलारिष्ट 4-4 चम्मच आधा कप पानी में डालकर पिएं। मालिश के लिए महानारायण तेल, महामाष तेल व बला तेल- तीनों 50-50 मि.ली. लेकर एक ही शीशी में भरकर मिला लें। दिन में दो बार लकवाग्रस्त अंग पर यह तेल लगाकर मालिश करें।

Homeopathic remedies for paralysis in Hindi | पैरालिसिस का होम्योपैथिक इलाज

i) कॉस्टिकम 200- पक्षाघात की प्रथमावस्था में यह दवा देनी चाहिये । इस दवा का विशेष प्रभाव मेरुदण्ड पर होता है जहाँ से होकर समस्त ज्ञान-तन्तु शरीर के विभिन्न अंगों को जाते हैं । या मस्तिष्क, दाँये अंग आदि प्रभावित हों- में प्रयोग की जाती है
ii) साइक्यूटा 200- यदि पक्षाघात की ऐसी अवस्था हो जिसमें सिर, गर्दन व रीढ़ पीछे को मुड़ जायें तो ऐसी स्थिति में इस दवा को एक गिलास पानी में मिलाकर उस पानी को दो-दो चम्मच की मात्रा में बार-बार पिलायें।
iii) जेल्सीमियम 30– यदि शरीर में पहले शून्यता आये, फिर कमजोरी के बाद पक्षाघात का आक्रमण हो तो इस दवा का प्रयोग करना चाहिये।
iv) कुरारी 30,200 – यदि पक्षाघात का आक्रमण पहले पैरों से शुरू होकर फिर ऊपर की तरफ बढ़ता हो तो ऐसी स्थिति में यह दवा प्रयोग करनी चाहिये।
v) लोवेलिया इन्फ्लैटा 200– यदि श्वासनलिका का हल्का-सा पक्षाघात ही या शरीर के आधे पक्षाघात के बाद शवासनलिका का पक्षाघात हो गया हो तो देनी चाहिये।
vi) स्टैनम 30- टाइपिस्ट या दर्जी, जो अंगुलियों से बारीक कार्य करते हैं, उनके पक्षाघात पर यह दवा देनी चाहिये, लाभ होगा |
vii) लोलियम टेमुलेण्टम 6 – यदि सायटिका व पक्षाघात हो तो यह दवा देनी चाहिये।
viii) थैलियम 30 – ऐसा पक्षाघात जिसमें निम्नांग या अन्द्रभाग ही प्रभावित हो तथा अंगों में कम्पन्न हो, इलैक्ट्रिक शॉक की तरह का दर्द अंगुलियों में हो एवं सुन्नपन में चीटियाँ चलने की अनुभूति हो तो इस दवा का लगातार प्रयोग करना चाहिये।
ix) एस्ट्रागैलस मेलिसिमस 12, 30 – यदि पैरों की पेशियों की स्वाभाविक क्षमता घट जाये व पक्षाघात जैसी स्थिति निर्मित हो जाये जिससे पैर ठीक से न पड़ते हों, चलने में परेशानी हो तो इस दवा का प्रयोग करना चाहिये।
x) डल्कामारा 30,200 – यदि ठण्ड लगने के बाद पक्षाघात हुआ हो तो इस दवा का प्रयोग करना चाहिये। यदाकदा रसटॉक्स 30 या 200 का भी प्रयोग करना चाहिये ।
xi) मेजेरियम 30,200 – अंगुलियों का ऐसा पक्षाघात जिसमें रोगी अंगुलियों से छोटी वस्तु पकड़ने में असमर्थ हो जाता हो तो उसको यह दवा देनी चाहिये।
Reference from – www.homeopathicmedicine.info/paralysis-treatment-in-homeopathy

first aid for paralysis in Hindi | पैरालिसिस का प्रारंभिक इलाज

i) अगर किसी को अचानक हाथ-पैर चलाने में, देखने में, बोलने में या बात समझने में दिक्कत हो या अचानक ऐसा दर्द हो जैसा कभी न हुआ हो, तो जल्द-से-जल्द उसे हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए। इसके इलाज में अटैक के बाद के 6 घंटे बहुत अहम होते हैं। इलाज में देरी होने से अपंग होने से लेकर जान जाने तक की आशंका रहती है।
ii) इस दौरान अगर मरीज बेहोश हो जाए तो उसको एक करवट लिटा देना चाहिए ताकि मुंह की लार फेफड़े में न जा पाए।
iii) अगर व्यक्ति मूर्छित हो तो उसे उठाकर बेड पर लिटा दे तथा सर को तकिये पर रख दे
iv) उन्हें खाने या पीने के लिए कुछ भी नहीं देना चाहिए ।
v) सुनिश्चित करें कि वायुमार्ग स्पष्ट और खुला हो
vi) उन्हें एक आरामदायक तापमान पर रखें
vii) तंग कपड़े को ढीला कर दे
viii) बेहतर है कि मरीज को एयर मेट्रेस पर रखें। इसमें प्रेशर अपनेआप कम-ज्यादा होता है।
ix) अगर खून की नली के अंदर ब्लड क्लॉट खून के दौरे को रोक रहा है तो उसको खत्म करने की दवा तकलीफ शुरू होने के तीन घंटे के अंदर मिल जानी चाहिए। इसके पहले सीटी स्कैन, एमआरआई, खून की जांच, ब्लड प्रेशर आदि की जांच करनी पड़ती है।
x) पैरालिसिस के मरीजों को दूसरे अटैक से बचने के लिए पहले अटैक के एक साल तक ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। पहले एक साल तक मरीजों में दूसरा अटैक होने का खतरा ज्यादा रहता है। दवाएं डॉक्टर से बिना पूछे बंद न करें। ब्लड प्रेशर और डायबीटीज कंट्रोल में रखें।

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Reference From
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