Infertility causes and treatment in Hindi | बाँझपन का कारण और इलाज





Infertility | Sterility causes and treatment in Hindi (बाँझपन का कारण और इलाज ) , बाँझपन जिसे कई लोग बन्ध्यापन तथा अनुर्वरता के नाम से भी जानते हैं | किसी भी युवक और युवती के लिए बाँझपन किसी अभिश्राप से कम नहीं होता | अमुमन हमारे समाज में बाँझपन की समस्या को महिलाओ से जोड़कर देखा जाता रहा हैं लेकिन यह अवधारणा बिल्कुल ही गलत हैं क्यूंकि एक बच्चे को जन्म देने में जितनी अहम भूमिका स्त्री की होती हैं उतनी ही सामान भागिदारी पुरुष की भी होती हैं | इसलिए बाँझपन के लिए सिर्फ स्त्री को जिम्मेवार ठहराना बिल्कुल ही गलत हैं | बांझपन से जुड़े कुछ अहम सवाल जैसे की
✪ Infertility | Sterility in Hindi | बाँझपन क्या हैं ?
✪ Infertility | Sterility causes in Hindi | बाँझपन के क्या कारण हैं ?
✪ Infertility | Sterility symptoms in Hindi | बाँझपन के क्या लक्षण हैं ?
✪ Infertility | Sterility treatment in Hindi | बाँझपन का घरेलू इलाज ?

Infertility causes and treatment in Hindi




बाँझपन की समस्या दो प्रकार की होतीं हैं – प्राकृतिक और अप्राकृतिक, अगर किसी महिला या पुरुष में बाँझपन की समस्या बचपन से यानि कुदरती है तो उस समस्या को प्राकृतिक बाँझपन समझा जाता हैं |
इनफर्टिलिटी मुख्यतय दो तरह से होती है। पहली जन्मजात जिसे ‘बन्ध्या‘ बांझपन से जाना जाता है। और दूसरी ‘मृतवत्सा वन्ध्या‘ से जाना जाता है, जिसमें पहला बच्चा होने पर दूसरा बच्चा नही होता। परन्तु आईवीएफ एवं कृत्रिम गर्भाधान उपचार के माध्यम से दोनो तरह के इनफर्टिलिटी का उपचार सम्भव है।

Infertility | Sterility in Hindi | बाँझपन | बन्ध्यापन क्या हैं ?

अगर कोई कपल गर्भनिरोधक और कंडोम के इस्तेमाल के बिना कम से कम एक साल या इससे भी अधिक समय तक शारीरिक सम्बन्ध बना रहे हो और उसके बाद भी संतान सुख से वंचित रह रहे हो तो उन महिला या पुरुष दोनों में से किसी एक के साथ infertility (बाँझपन) की समस्या हो सकती है | बांझपन एक बीमारी है, कोई अभिशाप नहीं । इसका इलाज अन्य बिमारियों की तरह संभव होता है ।

यह भी देखें

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Infertility Causes in Hindi | बाँझपन के क्या कारण हैं ?

पुरुष और स्त्री दोनों में अलग बाँझपन के कारण होते हैं जो की निम्नलिखित हैं
स्त्रियों में बाँझपन के कारण
स्त्रियों में Infertility के कई कारण हो सकते हैं जो की कई स्वास्थ्य समस्यायों से प्रभावित हो सकती है, जैसे कि :- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, श्रोणि सूजन की बीमारी, गर्भाशय फाइब्रॉएड, एनीमिया, थायराइड की समस्याएं, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा और यौन संचारित रोग (एसटीडी), अधिक मदिरा-सेवन, धुम्रपान, आयु (35 वर्ष से अधिक), मोटापा, अत्यधिक-तनाव, अनियमित एवं दर्दपूर्ण माहवारी की समस्या, पोषण-रहित भोजन या फिर अत्यधिक शारीरिक-प्रशिक्षण भी स्त्री की गर्भ-धारण क्षमता को प्रभावित करने के अहम कारण हैं

पुरुषों में बाँझपन के कारण
पुरुषों में Infertility की समस्या कई कारणों से हो सकता हैं जैसे की वैरीकोसेल (अंडकोषों से रक्‍त ले जाने वाली रक्‍तवाहिनी में सूजन आ जाती है, तब वैरीकोसेल होता है। इससे अंडकोषों में पर्याप्‍त मात्रा में रक्‍तप्रवाह नहीं हो पाता), प्रजनन क्षमता में कमी, शुक्राणु का कम या नहीं होना है, कभी-कभी शुक्राणु का कमजोर होना या अंडों तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय हो जाना,अंडकोषों पर गंभीर चोट भी शुक्राणुओं के स्‍तर को नुकसान पहुंचाती है, शुक्राणुओं के उत्‍पादन पर गर्मी का बुरा असर पड़ता है, इसलिए अधिक देर तक गर्म तापमान में न रहे, बहुत अधिक तनाव, थकान और अल्‍कोहल का सेवन भी कामेच्‍छा पर नकारात्‍मक असर डालते हैं।

Infertility Symptoms in Hindi | बाँझपन के क्या लक्षण हैं ?

पुरुष और स्त्री दोनों में अलग बाँझपन के कई लक्षण होते हैं अक्सर ऐसे लक्षण किसी भी में हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह भी बांझपन की शिकार है। वरन् जब यह लक्षण कुछ ज्यादा समय के लिए बढ़ जाएं तो उस महिला को सतर्क होने की आवश्यकता है।
स्त्रियों में बाँझपन के लक्षण

★ 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना.
★ पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना.
★ पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं.
★ मासिकचक्र में पीरियड्स न आना.
★ पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना.
★ मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना.
★ त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है.
★ सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना.
★ होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास.
★ बालों का झड़ना या पतला होना.
★ वजन बढ़ना.
★ निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है.
★ सैक्स के दौरान दर्द होना.

पुरुषों में बाँझपन के लक्षण
★ लिंग (Men’s Penis) में उत्तेजना न आना,
★ उत्तेजना आने के बाद जल्दी शांत हो जाना
★ वीर्य जल्दी स्खलित हो जाना
★ कामेच्छा की कमी
★ संभोग करने के दौरान या करने से पहले घबराहट होना
★ वीर्य की कमी अथवा पतला होना

Infertility Treatment in Hindi | बाँझपन का उपाय और इलाज

Medical science में Infertility Treatment के लिए दो विकल्प मौजूद हैं
आईवीएफ पद्धति / Vitro Fertilization (ibf)
आईवीएफ शरीरिक स्वस्थ जांच के बाद 4 बार तक सम्भव है। आईवीएफ विधि में महिला को इंजेक्शन लगायें जाते हैं। जिससे छोटे छोटे कृत्रिम अण्डे़ बनते हैं। अण्डों को परखनली में पुरूष स्पर्म मिलाकर अम्ब्रयोज बनाया जाता है, जिसे स्त्री गर्भ में पहुंचाया जाता है। जिससे बच्चा असानी से ठहर जाता है। आईवीएफ इलाज में 10 से 20 दिन का समय लग जाता है। सर्वे आंकड़ों के मुताबिक हर साल लाखों निसंतान दंपति आईवीएफ विधि का लाभ देते हैं। आईवीएफ निसंतान दंपतियों के लिए बरदान साबित है। आईवीएफ इजेक्शन विधि से 80 प्रतिशत सम्भावनाएं बढ़ जाती है।

कृत्रिम गर्भधारण / Artificial Insemination
कृत्रिम गर्भाधान या आइवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में अंडों को अंडाशय से शल्य क्रिया द्वारा बाहर निकाल कर शरीर से बाहर पेट्री डिश में शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है। करीब 40 घंटे के बाद अंडों का परीक्षण किया जाता है कि वे निषेचित हो गये हैं या नहीं और उनमें कोशिकाओं का विभाजन हो रहा है। इन निषेचित अंडों को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है और इस तरह गर्भ-नलिकाओं का उपयोग नहीं होता है। इस प्रक्रिया में, विशेष रूप से तैयार किए गए वीर्य को महिला के अन्दर इंजैक्शन द्वारा पहुँचाया जाता है।

Infertility home remedies in Hindi | बाँझपन का घरेलू दवा और इलाज

1. अश्वगंधा यह जड़ी बूटी हार्मोनल-संतुलन को बनाए रखने और प्रजनन अंगों के समुचित कार्य-क्षमता को बढ़ावा देने में कारगर है । यह बार-बार हुए गर्भपात के कारण, शिथिल-गर्भाशय को समुचित आकर में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है। गर्म पानी के एक गिलास में अश्वगंधा चूर्ण का 1 चम्मच मिश्रण बनाकर, दिन में दो बार लें ।

2. आयुर्वेद के अनुसार, बरगद के पेड़ की कोमल जडें महिला-बांझपन के इलाज में प्रभावी हैं । कुछ दिनों के लिए धूप में एक बरगद के पेड़ की कोमल जड़ों को सुखाएं । फिर इसका महीन चूरण बनाकर एक बंद डिब्बे में रख लें । एक गिलास दूध में चूरण के 1 से 2 बड़े चम्मच मिलाएं । माहवारी का समय खत्म होने के बाद लगातार तीन-रातों के लिए, खाली पेट इसे एक बार पियें । इसे पीने के बाद एक घंटे के लिए कुछ भी खाने से बचें । कुछ महीनों के लिए इस उपाय का पालन करें।
नोट: अपने मासिक-धर्म चक्र के दौरान इस उपाय का प्रयोग न करें ।

3 दालचीनी डिम्ब-ग्रंथि के सही-सही रूप से कार्य करने में मदद कर सकती है । और इस तरह से बांझपन से लड़ने में प्रभावशाली सिद्ध हो सकती है । यह पी सी ओ, बांझपन के मुख्य कारणों में से एक, के इलाज में भी मदद करती है। गर्म पानी के एक कप में, दालचीनी पाउडर का 1 चम्मच मिलाएं । कुछ महीनों के लिए दिन में एक बार इसे पीते रहें । इसके अलावा, अपने अनाज, दलिया, और दही पर भी दालचीनी पाउडर का छिड़काव कर के इसे अपने आहार में शामिल करें।

4. मासिकधर्म के पश्चात् प्रतिदिन 8 दिनों तक असली नागेश्वर का चूर्ण 3-3 ग्राम गाय के घी में मिलाकर सेवन करने से मात्र पहले या दूसरे महीने में ही अवश्य गर्भ ठहर जाता है। औषधि का सेवन प्रतिदिन दो बार सुबह शाम करायें।

5. कस्तूरी 2 रत्ती, अफीम, केसर, जायफल प्रत्येक एक एक ग्राम भांग के पत्ते 250 मिलीग्राम तथा पुराना गुड़, सफेद कत्था प्रत्येक छह ग्राम, सुपारी गुजराती 3 नग एवं लौंग 4 नग लें। सभी औषधियों को कूट छानकर जंगली बेर के समान 10 गोलियाँ बनाकर मासिक धर्म के पश्चात् एक एक गोली सुबह शाम 5 दिन खिलायें।

6. मोर के पंख के बीच वाले भाग (गहरा नीला) 9 नग लेकर गरम तवे पर भूनकर, बारीक पीसकर पुराने गुड़ में खूब मिलाकर नौ गोलियाँ बना लें। मासिक धर्म आने के दिनों में प्रतिदिन एक गोली 9 दिनों तक प्रातः सूर्योदय से पूर्व, दूध के साथ सेवन करायें। इसके पश्चात् दम्पत्ति सहवास करें तो निश्चित गर्भ ठहर जायेगा। यदि प्रयोग प्रथम मास में असफल रहे तो पुनः दूसरे या तीसरे मास प्रयोग करें।

7. शिवलिंगी के बीज, नागौरी असगन्ध, असली नागकेशर, मुलहठी, कमलकेसर, असली वंशलोचन प्रत्येक 10-10 ग्राम, मिश्री 100 ग्राम लें। सभी औषधियों को कूट-पीसकर चूर्ण बनायें। मासिकधर्म के पश्चात् प्रतिदिन सुबह, दोपहर, शाम 6-6 ग्राम की मात्रा में बछड़े वाली गाय के दूध के साथ प्रयोग करने से तथा स्त्री पुरूष का एक माह पूर्व से ब्रह्मचर्य का पालन करने तथा औषधि प्रयोग के 12वीं रात्रि सहवास करने से अवश्य गर्भ रहता है। एक माह में एक बार ही सहवास करें। अधिक से अधिक चार माह के प्रयोग से ही अवश्य गर्भ ठहर जाता है।

8. अमरबेल या आकाशबेल (जो बेर के समान वृक्षों पर पीले धागे के समान फैले होते हैं) को छाया में सुखाकर रख लें। इसे चूर्ण बनाकर मासिक-धर्म के चौथे दिन से पवित्र होकर प्रतिदिन स्नान के बाद 3 ग्राम चूर्ण 3 ग्राम जल के साथ सेवन करना चाहिए। इसे नियमित रूप से नौ दिनों तक सेवन करना चाहिए। सम्भवत: प्रथम आवृत्ति में ही गर्भाधान हो जाएगा। यदि ऐसा न हो सके तो योग पर अविश्वास न कर अगले आवृत्ति में भी प्रयोग करें, इसे घाछखेल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कच्चे धागे के क्वाथ (काढ़ा) से गर्भपात होता है।

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