Ganesh Pujan Vidhi in Hindi | गणेश चतुर्थी सम्पूर्ण एवं सरल पूजन विधि


Ganesh Pujan Vidhi in Hindi, गणेश चतुर्थी सम्पूर्ण एवं सरल पूजन विधि, भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को ‘गणेश चतुर्थी’ के तौर पर मनाया जाता है। हिंदुओं के आदि देव भगवान गणेश सब देवों में प्रथम पूज्यनीय है और सभी शुभ कार्यों से पहले उनकी पूजा की जाती है। भादो के महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती हैं, और विनायक चतुर्थी हर महीने मनाई जाती है। इस दिन से दस दिनों तक गणेश पूजा की जाती हैं। इसका महत्व देश के महाराष्ट्र प्रांत में अधिक देखा जाता हैं। महाराष्ट्र में गणेश जी का एक विशेष स्थान होता हैं। वहाँ पुरे रीती रिवाजों के साथ गणेश जी की स्थापना की जाती हैं उनका पूजन किया जाता हैं। पूरा देश गणेश उत्सव मनाता हैं । गणेश चतुर्थी 2017 में 25 अगस्त को मनाई जाएगी।




Ganesh Pujan Vidhi in Hindi

i) भद्रपद की गणेश चतुर्थी में सर्वप्रथम पचांग में मुहूर्त देख कर गणेश जी की स्थापना की जाती हैं.
ii) सबसे पहले एक ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर रंगोली डाली जाती हैं, जिसे चौक पुरना कहते हैं.
iii) उसके उपर पाटा अथवा चौकी रख कर उस पर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाते हैं.
iv) उस कपड़े पर केले के पत्ते को रख कर उस पर मूर्ति की स्थापना की जाती हैं.
v) इसके साथ एक पान पर सवा रूपये रख पूजा की सुपारी रखी जाती हैं.
vi) कलश भी रखा जाता हैं एक लोटे पर नारियल को रख कर उस लौटे के मुख कर लाल धागा बांधा जाता हैं.
vii) यह कलश पुरे दस दिन तक ऐसे ही रखा जाता हैं. दसवे दिन इस पर रखे नारियल को फोड़ कर प्रशाद खाया जाता हैं.
viii) सबसे पहले कलश की पूजा की जाती हैं जिसमे जल, कुमकुम, चावल चढ़ा कर पुष्प अर्पित किये जाते हैं.
ix) कलश के बाद गणेश देवता की पूजा की जाती हैं. उन्हें भी जल चढ़ाकर वस्त्र पहनाए जाते हैं फिर कुमकुम एवम चावल चढ़ाकर पुष्प समर्पित किये जाते हैं.
x) गणेश जी को मुख्य रूप से दूबा चढ़ायी जाती हैं.
xi) इसके बाद भोग लगाया जाता हैं. गणेश जी को मोदक प्रिय होते हैं.
xii) फिर सभी परिवार जनो के साथ आरती की जाती हैं. इसके बाद प्रशाद वितरित किया जाता हैं.

गणेश चतुर्थी पूजन विधि, पूजा मुहूर्त, पूजन सामग्री जानने के लिए यहाँ देखे




गणेश चतुर्थी सम्पूर्ण एवं सरल पूजन विधि

i) पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें।

ii) आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठकर तीन बार निम्न मंत्र बोलकर आचमन करें।

ॐ केशवाय नम:
ॐ नारायणाय नम:
ॐ माधवाय नम:

आचमन के पश्चात हाथ में जल लेकर ‘ॐ ऋषिकेशाय नम: बोलकर हाथ धो लें।

iii)
हाथ धोने के बाद पवित्री धारण करें, पवित्री के बाद बाएं हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजन सामग्री पर छिड़क ले।

ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु,
ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु,
ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु

बोलकर गणेश जी एवं अम्बिका (सुपारी में मौली लपेटकर) को स्थापित करें निम्न मंत्र बोलकर आवाहन करें।

ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:!!

iv)फिर कामना-विशेष का नाम लेकर संकल्प ले लें, अर्थात दाहिने हाथ में जल, सुपारी, सिक्का, फूल एवं चावल लेकर जिस निमित्त पूजन कर रहे है उसका मन में उच्चारण करके थाली या गणेश जी के सामने छोड़ दें।

v) अब हाथ में चावल लेकर गणेश अम्बिका का ध्यान करें।

ॐ भूर्भुव:स्व: सिध्दिबुध्दिसहिताय गणपतये नम:,
गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च!
ॐ भूर्भुव:स्व:गौर्ये नम:,गौरीमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च!

vi)आसन के लिए चावल चढ़ाएं,

ॐ गणेश-अम्बिके नम:आसनार्थे अक्षतान समर्पयामि!

viii) फिर स्नान के लिए जल चढ़ाएं,

ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:स्नानार्थ जलं समर्पयामि!

ix) फिर दूध चढ़ाएं

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पय:स्नानं समर्पयामि!

x) फिर दही चढ़ाएं

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, दधिस्नानं समर्पयामि!

xi) फिर घी चढ़ाएं

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,घृतस्नानं समर्पयामि!




xii) फिर शहद चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,मधुस्नानं समर्पयामि।

xiii) फिर शक्कर चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,शर्करास्नानं समर्पयामि।

xiv) फिर पंचामृत चढ़ाएं। (दूध, दही, शहद, शक्कर एवं घी को मिलाकर)

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पंचामृतस्नानं समर्पयामि!

xv) फिर चंदन घोलकर चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,गंधोदकस्नानं समर्पयामि!

xvi) फिर शुद्ध जल डालकर शुद्ध करें।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,शुध्दोदकस्नानं समर्पयामि!

फिर उनको आसन पर विराजमान करें।

xvii) फिर वस्त्र चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,वस्त्रं समर्पयामि!

फिर आचमनी जल छोड़ दे,

xviii) उसके बाद उपवस्त्र (मौली) चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, उपवस्त्रं समर्पयामि!

फिर आचमनी जल छोड़ दे,

xix) फिर गणेश जी को यज्ञोपवित (जनेऊ) चढ़ाएं!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाभ्यां नम:यज्ञोपवितं समर्पयामि!

फिर आचमनी जल छोड़ दें।

xx) फिर चन्दन लगाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,चंदनानुलेपनं समर्पयामि!

xxi) फिर चावल चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,अक्षतान समर्पयामि!

xxii) फिर फूल-फूलमाला चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पुष्पमालां समर्पयामि!

xxiii) फिर दूर्वा चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, दुर्वाकरान समर्पयामि।

xxiv) फिर सिन्दूर चढ़ाएं!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, सिन्दूरं समर्पयामि!

xxv) फिर अबीर, गुलाल, हल्दी आदि चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, नानापरिमलद्रव्याणि समर्पयामि!

xxvi) फिर सुगंधित (इत्र) चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, सुंगधिद्रव्यं समर्पयामि!

xxvii) फिर धूप-दीप दिखाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,धूप-दीपं दर्शयामि!

xxviii) फिर ऋषि केशाय नम: बोलकर हाथ धोकर नैवेद्य लगाए।

ॐ प्राणाय स्वाहा! ॐ अपानाय स्वाहा! ॐ समानाय स्वाहा!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, नैवेद्यं निवेदयामि!

xxix) फिर ऋतुफल चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,ऋतुफलानि समर्पयामि!

xxx) फिर लौंग-इलायची, सुपारी अर्पित करें।

फिर दक्षिणा चढ़ाकर भगवान गणेश जी की आरती करें।

फिर परिक्रमा करें! तत्पश्चात भगवान गणेश-अम्बिका से प्रार्थना करें!

फिर दाहिने हाथ में जल लेकर पृथ्वी पर छोड़ दें।

यह बोलकर अन्य पूज्य गणेशाम्बिके प्रीयेताम न मम!

इस प्रकार श्री गणेश जी की पूजन कर अपने संपूर्ण मनोरथ पूर्ण करें।

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Sources By – webdunia.com

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