Ganesh Chaturthi pujan vidhi | गणेश चतुर्थी पूजन विधि, पूजा मुहूर्त, पूजन सामग्री


Ganesh Chaturthi pujan vidhi in Hindi, गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है| हिन्दू शास्त्रों के अनुसार शुक्ल पक्ष के भाद्रपद को भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसलिए हर वर्ष इनके जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी का त्यौहार मनाया जाता है। भगवान गणेश ऋद्धि-सिद्धि और सौभाग्य के देवता है। श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो।




Ganesh Chaturthi Pujan Vidhi in Hindi

विघ्नकर्ता और हर्ता, भगवान गणेश विनायक, गजानन, लम्बोदर, गणपति के ही नाम है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार गणेश चतुर्थी का दिन अगस्त अथवा सितम्बर के महीने में आता है। श्रीगणेश चतुर्थी को पत्थर चौथ और कलंक चौथ के नाम भी जाना जाता है। आइये गणेश चतुर्थी पूजन विधि, पूजा मुहूर्त, पूजन सामग्री और विषर्जन विधि के बारे में विस्तार पूर्वक जाने

Ganesh Chaturthi shubh muhurat in Hindi | गणेश चतुर्थी पूजन मुहूर्त

☆ चतुर्थी तिथि प्रारम्भ -> 16:07 on 12/Sep/2018
☆ चतुर्थी तिथि समाप्त -> 14:51 on 13/Sep/2018
☆ मध्याह्न गणेश पूजा का समय -> 11:03 am to 01:30 pm (2 घण्टा 27 मिनट्स)
☆ 12th को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय -> 04:07 pm to 08:33 pm (4 घण्टा 26 मिनट्स)
☆ 13th को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय -> 09:31 am to 09:12 pm (अवधि -> 11 घण्टा 40 मिनट्स)

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र-दर्शन वर्ज्य होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चन्द्र के दर्शन करने से मिथ्या दोष अथवा मिथ्या कलंक लगता है जिसकी वजह से दर्शनार्थी को चोरी का झूठा आरोप सहना पड़ता है।




Ganesh Chaturthi pujan samagri in Hindi | गणेश चतुर्थी पूजन सामग्री

गणेश चतुर्थी के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की लिस्ट
i) गणेश जी को बिठाने के लिए चौकी
ii) चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपडा
iii) जल कलश
iv) पंचामृत
v) रोली , मोली , लाल चन्दन
vi) जनेऊ
vii) गंगाजल
viii) सिन्दूर
ix) चांदी का वर्क
x) लाल फूल और माला, दूर्वा – दूब
xi) इत्र
xii) मोदक या लडडू
xiii) नारियल
xiv) गुड़ और खड़ा धना, सुपारी,लौंग ,इलायची, धानी, हरे मुंग
xv) फल
xvi) पंचमेवा
xvii) घी का दीपक
xviii) धूप , अगरबत्ती, कपूर

गणेश चतुर्थी के दौरान बरते जाने वाली जरुरी सावधानी

i) गणेश जी के स्थान के उलटे हाथ की तरफ जल से भरा हुआ कलश चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करें। धूप व अगरबत्ती लगाएं। कलश के मुख पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें।

ii) भगवान गणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। उन्हें, शुद्ध स्थान से चुनी हुई दूर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए।

iii) नारियल की जटाएं सदैव ऊपर रहनी चाहिए। घी एवं चंदन को ताम्बे के कलश में नहीं रखना चाहिए। गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखना चाहिए। सुपारी गणेश भी रखें।

iv) पूजन के प्रारंभ में हाथ अक्षत, जल एवं पुष्प लेकर स्वस्तिवाचन, गणेश ध्यान एवं समस्त देवताओं का स्मरण करें। अब अक्षत एवं पुष्प चौकी पर समर्पित करें। इसके पश्चात एक सुपारी में मौली लपेटकर चौकी पर थोड़े-से अक्षत रख उस पर वह सुपारी स्थापित करें। भगवान गणेश का आह्वान करें। गणेश आह्वान के बाद कलश पूजन करें।

v) कलश उत्तर-पूर्व दिशा या चौकी की बाईं ओर स्थापित करें। कलश पूजन के बाद दीप पूजन करें। इसके बाद पंचोपचार या षोडषोपचार के द्वारा गणेश पूजन करें। परंपरानुसार पूजन करें। आरती करें।

Ganesh Chaturthi pujan vidhi in Hindi

भगवान गणेश की गणेश-चतुर्थी के दिन सोलह उपचारों से वैदिक मन्त्रों के जापों के साथ पूजा की जाती है। जिसे षोडशोपचार पूजा कहते हैं। भगवान गणेश को प्रातःकाल, मध्याह्न और सायाह्न में से किसी भी समय पूजा जा सकता है। परन्तु गणेश-चतुर्थी के दिन मध्याह्न का समय गणेश-पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। शास्त्रानुसार श्रीगणेश की पार्थिव प्रतिमा बनाकर उसे प्राणप्रति‍ष्ठित कर पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित कर देने का आख्यान मिलता है। किन्तु भजन-कीर्तन आदि आयोजनों और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण भक्त 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजन अर्चन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी की षोडषोपचार पूजन प्रक्रिया

1. आह्वान,
2. आसन (स्थान ग्रहण कराएं),
3. पाद्य (हाथ में जल लेकर मंत्र पढ़ते हुए प्रभु के चरणों में अर्पित करें),
4. अर्घ्य (चंद्रमा को अर्घ्य देने की तरह पानी छोड़ें),
5. आचमनीय (मंत्र पढ़ते हुए 3 बार जल छोड़ें),
6. स्नान (पान के पत्ते या दूर्वा से पानी लेकर छींटें मारें),
7. वस्त्र (सिलेसिलाए वस्त्र, पीताम्बरी कपड़ा या कलावा),
8. यज्ञोपवीत (जनेऊ),
9. आभूषण (हार, मालाएं, पगड़ी आदि),
10. गंध (इत्र छिड़कें या चंदन अर्पित करें),
11. पुष्प,
12. धूप,
13. दीप,
14. नैवेद्य (पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि रखें।),
15. ताम्बूल (पान चढ़ाएं),
16. प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि।

गणेश चतुर्थी सम्पूर्ण एवं सरल पूजन विधि जानने के लिए यहाँ देखे




गणेश चतुर्थी विसर्जन विधि

विसर्जन’ शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है कि ‘पानी में विलीन होना’, ये सम्मान सूचक प्रक्रिया है इसलिए घर में पूजा के लिए प्रयोग की गई मूर्तियों को विसर्जित करके उन्हें सम्मान दिया जाता है। गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव, १० दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सड़क पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं।

i) एक स्वच्छ तख्ता लें। उसे गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें। घर की स्त्री उस पर स्वास्तिक बनाएं। उस पर अक्षत रखें। इस पर एक पीला, गुलाबी या लाल सुसज्जित वस्त्र बिछाएं।
ii) इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखेरें। साथ में तख्ता के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें।
iii) अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और इस पाटे पर विराजित करें। पाटे पर विराजित करने के उपरांत उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक रखें।
iv) नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती पुन: संपन्न करें। श्री गणेश से खुशी-खुशी बिदाई की कामना करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांगे।

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Sources By – drikpanchang.com

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