Food Poisoning solution in hindi | फूड प्वाइजनिंग का इलाज


Food Poisoning : Causes, Symptoms and Treatment in Hindi, फूड प्वाइजनिंग दूषित भोजन के सेवन से होने वाली स्वास्थ्य से जुड़ी एक आम समस्या हैं – फूड प्वाइजनिंग को खाद्य जनित बीमारी (फूडबोर्न इलनेस) के नाम से भी जाना जाता है। वैसे ज्यादातर मामलो में फूड प्वाइजनिंग का असर कुछ देर अथवा कुछ दिनों में स्वतः ठीक जाता हैं। लेकिन शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों में जल्द से जल्द फूड प्वाइजनिंग के लक्षण को पहचान कर इसके रोकथाम के उपाय करने चाहिए। क्योंकि इससे इनको काफी नुक्सान पहुंच सकता है। आइये फूड प्वाइजनिंग व बदहजमी के – लक्षण, कारण और घरलू इलाज के बारे में जाने।



Food Poisoning : Causes, Symptoms and Treatment in Hindi

फूड प्वाइजनिंग क्या होता हैं (What is Food Poisoning in Hindi) – फूड प्वाइजनिंग एक प्रकार का इन्फेक्शन हैं जो की पैथोजेनिक बैक्टेरिया, वायरस या परजीवी (पैरासाइट्स) के कारण दूषित हुए भोजन को खाने से होता है। ये सूक्ष्म जीव न केवल खाने को गंदा करते हैं बल्कि वे खाने के बाद लिवर में भी समस्या उत्पन्न करते हैं जिसके दुष्टप्रभाव के वजह से कुछ समय बाद पीड़ित व्यक्ति को उल्टी, मतली, दस्त जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं।
इसके अलावा, लेग्यूम जैसी चीज़ों में मौजूद केमिकल औऱ एमिलेज (amylase) जैसे प्राकृतिक विषैले तत्व भी खाने को दूषित बनाने का कार्य करते हैं। कई बार तो खाने के बाद महसूस होनेवाला नशा भी Food Poisoning का कारण बनता है। क्योंकि खाने में मौजूद बैक्टेरिया खाने को विषैला बना देते हैं। खाने से होनेवाले नशे का सबसे आम कारण बनते हैं क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (Clostridium botulinum), बकिल्लुस सेरेउस (Bacillus cereus) और क्लोस्ट्रीडियम परफ्रीनजेन्स (Clostridium perfringens) जैसे जीव होते हैं।
इनका मुख्य स्रोत अधपका – कच्चा खाना, बासी खाना,बिना ढके हुवे खाद्य-पदार्थ का सेवन करना, खाने से पहले साफ-सफाई का ध्यान न रखना मुख्य हैं।

फूड प्वाइजनिंग होने के कारण | Food Poisoning Causes in Hindi

फूड प्वाइजनिंग क्यों होता हैं इसके बारे में विस्तार से जान लें।
i) पुराना बासी खाना खाने से, भूख से अधिक भोजन करने से
ii) खराब सड़ी-गली सब्जी, फलो या अन्य खाद्य पदार्थो के सेवन से
iii) दूषित पानी के सेवन से
iv) गंदे हाथो या गंदे बर्तनों में खाना खाने से
v) जीवाणु, वायरस मक्खी या कीट पतंगो द्वारा दूषित भोजन के सेवन से
vi) खुले व बिना ढके हुवे खाद्य-पदार्थ का सेवन करने से
vii ऐसे खाद्य सामग्री जैसे दूध पनीर, खोया ,मावा आदि को इस्तमाल करने की तिथि का एक्स्पायर्ड हो जाने के बाद सेवन करने से
viii) विषाक्त समुद्री भोजन, पौधों या कवक आदि
ix) खतरनाक रसायनों से युक्त भोजन, ई-कोलाइ सालमोनेला (salmonella) या किसी अन्य तरह के बैक्टीरिया द्वारा प्रदूषित किया गया भोजन के सेवन से
x) तले हुए, गाढ़े सॉस, बोतलबंद खाना व पेय पदार्थ, मसालेदार भोजन और कच्चा मांस खाने से

इसके अलावा कुछ ऐसे बेमेल यानि की दो या दो से अधिक खाद्य पदार्थो का सेवन जो स्वास्थयप्रद न हो उसके सेवन से भी फूड प्वाइजनिंग की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं।




फूड प्वाइजनिंग के लक्षण व संकेत | Food Poisoning Symptoms in Hindi

भोजन को दूषित करने वाले स्त्रोत के अनुसार फूड प्वाइजनिंग के लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। ज्यादातर Food Poisoning के मामलों में एक से ज्यादा लक्षण देखे जाते हैं। जिनमें से निम्न शामिल हैं:
i) बार-बार उल्टी आना
ii) पेट दर्द व ऐंठन होना
iii) दस्त आना
iv) शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होना
v) डिहाइड्रेश्न के लक्षण जैसे अधिक प्यास लगना, मुंह सूखना रहना, पेशाब बंद या कम आना, अत्याधिक कमजोरी महसूस होना और सिर में चक्कर रहना आदि।
vi) शरीर के अंदर का तापमान 101.5 F से भी उपर होना

दूषित भोजन खाने के 2 से 3 घंटों के बाद फूड पाइज़निंग के संकेत व लक्षण शुरू हो जाते हैं, कई बार लक्षण दिखने में कुछ दिन भी लगा सकते हैं। दूषित भोजन से होने वाली अस्वस्थता कुछ घंटे से कुछ दिनों तक रह सकती है।

फूड प्वाइजनिंग से बचने के उपाय व तरीके | Prevention Tips from Food Poisoning in Hindi

फूड पाइज़निंग विशेष रूप से वृद्धों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो उनके लिए एक गंभीर और जीवन के लिए खतरनाक स्तिथि बन सकती है। इन स्थिति वालें लोगों को निम्न चीजों का सेवन नही करनी चाहिए
i) हाथ धोकर ही भोजन करें और बाथरूम जाने के बाद हाथों को अच्छी तरह से साफ करें।
ii) ऐसे खाना न खाएं जो कई देर से खुले में रखा हुआ हो और उसमें से महक आने लग गई हो। इसके अलावा अगर पैकेट पर डेट एक्‍सपायर हो गई हो तो भी उसे न खाएं।
iii) बरसात और गर्मी के मौसम में इंफेक्शन का ख़तरा काफी बढ़ जाता है इसलिए उस मौसम में गर्म और ताज़ा खाना खाएं।
iv) खाने को फ़्रिज में रखने और खाने से पहले गर्म करने की प्रक्रिया से भी बैक्टेरिया पनपने का डर होता है। इसलिए जहां तक हो ऐसा करने से बचें।
v) आसपास की साफ-सफाई का ध्यान रखें, साफ बर्तनों में खाना पकाएं और खाएं।
vi) अगर आप निश्चित नहीं है, कि भोजन को सुरक्षित तरीके से बनाया और रखा गया है, तो ऐसे स्तिथि में ना खाएं। बाहरी तापमान में ज्यादा देर तक खाद्य पदार्थों को रखने से उनमें बैक्टिरिया और अन्य विषाक्त पदार्थ पैदा हो सकते हैं, जिनको पकाने पर भी नष्ट नहीं किया जा सकता। खाद्य पदार्थ पर संदेह कि स्थिति में उसे भी नहीं चाहिए बल्कि बाहर फेंक देना चाहिए।
vii) खाद्य पदार्थों को रेफ्रिजरेटर के बाद सीधे बाहरी वातावरण में ना पिघलने दें, उन्हें बाहर निकालने से पहले फ्रिज में डीफ्रोस्ट फीचर का इस्तेमाल करें। फ्रिज के बाद माइक्रोवेव में खाना रखने से पहले उन्हें फ्रिज में ही डीफ्रोस्ट करें या माइक्रोवेव में 50 प्रतिशत पावर के साथ गर्म करें। साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि इस खाद्य पदार्थ को तुरंत ही पकाया और खाया जाना चाहिए।
viii) ऐसे खाद्य पदार्थों को खरीदने या बनाने के 2 घंटे से ज्यादा बाहर ना रखें। अगर बाहर का तापमान 32.2 C है, तो इन्हें 1 घंटे से ज्यादा समय तक बाहर ना रखें।

फूड प्वाइजनिंग के घरेलू इलाज | Home Remedies for Food Poisoning in Hindi

i) ज्यादा मात्रा में द्रव लें – अगर आपको फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखें तो जितना हो सके पेय पदार्थ पीजिए। पानी, डिकैफिनेटेड चाय या जूस जो भी आप पी सकते हैं उसे पिएं। साथ ही, सूप, पतली खिचड़ी, नारियल पानी, चावल का पानी, ग्लूकोल, इलेक्ट्रॉल पाउडर का घोल आदि लेना चाहिए। इससे आप तरल पदार्थ की कमी को दूर कर सकते हैं। ये निर्जलीकरण को रोकने में भी मदद करेगा।
ii) इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करें – यदि आपके शरीर में डीहाइड्रेशन के माध्यम से पोषक तत्वों की अधिक मात्रा में कमी हो रही हो तो आप उनकी भरपाई के लिए फार्मेसी से कोई इलेक्ट्रोलाइट सोल्युशन खरीद सकते हैं। गैटोरेड (Gatorade) या पेडियालाइट (Pedialyte) भी इस मामले में अच्छा कार्य करेंगे।
iii) अदरक – अदरक डाइजेशन के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स को अब्जॉर्ब करता है। साथ ही, उल्टी और जी मिचलाने की समस्या में भी तुरंत राहत दिलाता है।
पानी में अदरक के टुकड़े को घिसकर डालें और कुछ देर तक के लिए इसे उबलने दें। स्वाद के लिए इसमें थोड़ा शहद और शक्कर मिलाएं। एक दूसरा ऑप्शन भी है। अदरक के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। ये दर्द और सूजन, दोनों से ही जल्द राहत दिलाता है।
iv सेब का सिरका – सेब के सिरके में एसिड की मात्रा मौजूद होती है। इसका एल्कलाइन फैक्टर बॉडी के मेटाबॉलिज्म लेवल को सही रखता है। साथ ही, यह Food Poisoning की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। गैस, एसिडिटी जैसी कई समस्याओं से तुरंत निजात पाने के लिए सिरके का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है। एक कप गर्म पानी में दो चम्मच सिरका डालें और खाने के पहले इसे पी लें।
v तुलसी – तुलसी संक्रमण के इलाज के लिए बहुत ही शानदार उपाय होता है। फूड पॉइजनिंग होने पर तुलसी के पत्तों के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से आप को बहुत ही फायदा मिलता है।
vi केला – केला में पोटेशियम की अधिक मात्रा होती है, इसलिए जब भी हमें फूड पॉइजनिंग हो तो केले का सेवन करना चाहिए। केले को दही में मैश करके खाने से हमे दस्त से भी छुटकारा मिल जाता है।
vii दही का सेवन – दही में एंटी बैक्टीरिया गुण पायें जाते हैं, जो हमारे लीवर में होने वाले संक्रमण को रोकते हैं, फूड प्वाइजनिंग वाले मरीज को खाली पेट या खाने के तुरंत बाद दही देना चाहिए।
viii नींबू पानी का घोल निम्बू में मौजूद anti-inflammatory, antiviral और antibacterial properties इस समस्या में काफी राहत प्रदान करती हैं। निम्बू में acidic properties भी होती हैं जो bacteria को खत्म करने में मदद करती हैं।
ix जीरा – Food Poisoning के कारण हुए abdominal discomfort और stomach inflammation को जीरा आसानी से ठीक कर देता है। एक चम्मच जीरा को एक कप पानी में गर्म करें। अब इसमें एक चम्मच फ्रेश धनिये से बने जूस को मिलाएं और स्वादानुसार नमक डाल लें। इसे दिन में दो बार सेवन करें। आप जीरा और हींग को मिलाकर हर्बल ड्रिंक भी तैयार कर सकते हैं। इसे भी दिन में दो बार सेवन करें।

फूड प्वाइजनिंग के आयुर्वेदिक इलाज | Ayurvedic Medicine for Food Poisoning in Hindi

i) हरड़ – पिसी हुई हरड़ का चूर्ण एक चुटकी और आधा चुटकी पीपल का चूर्ण लेकर सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।
ii) भारंगी – अक्सर गलत विशुद्ध खाना खाने के कारण फ़ूड पोइजनिंग हो जाती है या पेट में अन्य संक्रमण पैदा हो जाते है जैसेकि कब्ज, गैस इत्यादि. ऐसी अवस्था में भारंगी के पंचांग से काढा तैयार करके पी जाएँ। 2 – 3 बार के प्रयोग में ही पेट विकार दूर हो जायेंगे। वहीँ इसके बीज के पाउडर का 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
iii) आलूबुखारा – आलूबुखारे को पीसकर नींबू के रस में मिलाकर और इसमें कालीमिर्च, जीरा, सोंठ, कालानमक, सेंधानमक, धनिया व अजवायन बराबर मात्रा में मिलाकर चटनी की तरह बनाकर खाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है।
iv) शुठी के रस – पाचनक्रिया की गड़बड़ी होने पर शुठी के रस को एक तिहाई कप दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम करें।
v) नौसादर – नौसादर 10 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम, भुनी हुई हींग 10 ग्राम और सोंठ 10 ग्राम को अच्छी तरह बारीक पीसकर इसमें मीठा सोडा 10 ग्राम मिलाकर रख लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ पीने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

फूड प्वाइजनिंग के होम्योपैथिक इलाज | Homeopathic Medicine for Food Poisoning in Hindi

i)पेट दर्द होने के साथ ही कब्ज तथा पेट फूलने के लक्षण दिखाई दें तो पल्सेटिला औषधि की 6 शक्ति या लाइकोपोडियम की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
ii) पेट के ऊपरी भाग में जलन होना, पित्त की उल्टी आना, मरोड़ की तरह दर्द होना, अधिक पेट फूलना आदि लक्षण होने पर उपचार करने के लिए आइरिस-वार्स औषधि की 3 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
iii) पेट में दर्द हो तथा उल्टी आ रही हो तथा पीछे की तरफ झुकने से आराम मिले तो डायोस्कोरिया औषधि की 3 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।
iv) यदि किसी को अपच का रोग हो गया हो तथा भोजन न पचकर दस्त तथा उल्टी हो रही हो, खाना खाने के बाद भोजन पेट में पचता नहीं है और पड़ा रह जता है, दस्त होने लगता है और बिना पचा हुआ भोजन दस्त में आने लगता है। इस प्रकार के लक्षण रोगी में दिखाई दें तो उसके रोग को ठीक करने के लिए उसे चायना औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराए, इससे उसे लाभ मिलेगा।

नोट: ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक है अतः दवा डॉक्टर से पूछे बिना कतई न लें।

संबधित लिंक
☛ लिवर और उसकी कार्यप्रणाली
☛ लिवर से जुडी बीमारियाँ
लिवर | जिगर खराब होने के लक्षण.
लिवर ख़राब होने के कारण
लिवर | जिगर की देखभाल

अन्य जरुरी लेख
निमोनिया के कारण,लक्षण,प्रकार और घरेलू इलाज
दस्त व डायरिया के कारण,लक्षण,प्रकार और घरेलू इलाज
उल्टी , जी मिचलाना के कारण और घरेलू इलाज
कब्ज का घरेलू दवा, कब्ज से कैसे बचे/a>
डीहाइड्रेशन के कारण,लक्षण,प्रकार और घरेलू इलाज
खून की कमी (एनीमिया) के लक्षण, कारण, इलाज, दवा, उपचार और परहेज

Reference From
myupchar.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.