Chhath Pooja Special Tips in Hindi | छठ पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री


chhath Pooja Special Tips in Hindi, छठ पूजा हिन्दू धर्म में श्रद्धा, आस्था और पवित्रता का महापर्व है । यह साल में दो बार जो की हिन्दी तिथि के अनुसार पहला छठ पर्व चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है । चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ चैती छठ पूजा और कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ कार्तिकी छठ छठ पूजा के नाम से जाना जाता है । साधारणतः छठ पूजा दिवाली के छः दिनों के उपरांत ही मनाया जाता है । मुख्यतः:इस पर्व को बिहार, पूर्वांचल, झारखंड,यूपी और नेपाल के साथ साथ सम्पूर्ण भारतवर्ष में धूम-धाम से मनाया जाता है ।
छठ पूजा पुरुष एवं स्त्री एक सामान रूप से मनाते हैं । Chhath Pooja में सूर्यदेव की उपासना की जाती है । वेद पुराणों के मान्यता के अनुसार छठ देवी सूर्यदेव की बहन है । इसलिए छठ पर्व पर छठ देवी के साथ सूर्य देव को प्रसन्न करना अनिवार्य हो जाता है ।

chhath Pooja Special Tips in Hindi




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आज हम आपको छठ पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और इसके महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।

छठ पूजा शुभ मुहूर्त व तारीख 2018 | Chhath Puja Shubh Muhurat and Date 2018

छठ महापर्व का चार दिवसीय कार्यक्रम
नहाय-खाए: 11 नवंबर 2018 (रविवार)
खरना(लोहंडा): 12 नवंबर 2018 (सोमवार)
सायंकालीन अर्घ्य- 13 नवंबर 2018 (मंगलवार)
सायंकालीन अर्घ्य का समय :- सांय काल 05:40 बजे से शुरू
प्रात:कालीन अर्घ्य: 14 नवंबर 2018 (बुधवार)
प्रात:कालीन अर्घ्य का समय: प्रात: 6.28 बजे से शुरू
षष्ठी तिथि प्रारंभ- रात्रि 01:50 बजे से (13 नवंबर 2018)
षष्ठी तिथि समाप्त – प्रात: 04:22 बजे तक (14 नवंबर 2018 )

Chhath Pooja Vidhi in Hindi

Chhath Pooja Vidhi in Hindi

छठ पूजन सामग्री । Chhath Pujan Samagri

☛ बॉस या पितल की सूप
☛ बॉस के फट्टे से बने दौरा व डलिया
☛ पानी वाला नारियल
☛ गन्ना पत्तो के साथ
☛ सुथनी
☛ शकरकंदी
☛ डगरा
☛ हल्दी और अदरक का पौधा
☛ नाशपाती
☛ नींबू बड़ा
☛ शहद की डिब्बी
☛ पान सुपारी
☛ कैराव
☛ सिंदूर
☛ कपूर
☛ कुमकुम
☛ चावल अक्षत के लिए
☛ चन्दन
इसके अलावा घर पे बने हुवे पकवान जैसे खस्ता,पुवा,ठेकुवा जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, इसके अलावा चावल के लड्डू, जिसे लड़ुआ भी कहा जाता है, इत्यादि छठ पूजन के सामग्री में शामिल है ।




Chhath nahaay khaay Vidhi in Hindi | छठ नहाय खाय विधि

नहाय-खाय के दिन कद्दू का खास महत्व होता है । इस दिन सभी लोग अपने घर कि साफ़ सफाई करते है और घर को पूरी तरह से शुद्ध करते है. जो भी लोग इस व्रत को करते है वह विशेष रूप से भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण करते है। जिसमे दाल चने की और चावल अरवा का उपयोग किया जाता है । घर के सभी सदस्य को व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करना चाहिए ।

Chhath Kharna Vidhi in Hindi | छठ खरना विधि । छठ लोहंडा विधि

दूसरे दिन यानी कि कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना के रूप में जाना जाता है । इस दिन व्रत करने वाले लोग दिनभर उपवास रखते है । शाम को में गुड़ से बने हुए चावल की खीर जिसे बखीर कहते है , चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है । पूजन उपरांत सभी को प्रसाद के रूप में बखीर और पूरी खाने के लिए देना चाहिए । ऐसा मान्यता है की पूजा के दौरान व्रती के कानो में किसी की आवाज नहीं आनी चाहिए इसलिए किसी एकांत जगह पर ही छठ खरना की विधि संपन्न करनी चाहिए ।

Chhath Pooja Vidhi in Hindi | छठ पूजा विधि

☛ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे संभव हो तो एक अलग कमरे का चयन कर ले
☛ व्रती नए कपडे पहने
☛ ऐशे कपडे का उपयोग करे जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की हो
☛ स्त्री साडी तथा पुरुष धोती और बंडी का उपयोग कर सकते है
☛ पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर पर ही सोये
☛ शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोंसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए
☛ घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।’
☛ छठ पर्व में मंदिरों में पूजा नहीं की जाती है और ना ही घर में साफ़-सफाई की जाती है|
☛ पर्व से दो दिन पूर्व चतुर्थी पर स्नानादि से निवृत्त होकर भोजन किया जाता है।

Chhath Pooja में पवत्रिता का खासा ध्यान रखना पड़ता है । व्रती को निराजल व्रत रखना चाहिए अपवाद में वृद्ध और मरीज पानी पी सकते है । आस-पास अगर कोई जल संग्रह स्थान जैसे नदी,पोखर,तालाब इत्यादि हो अगर इनमे से कुछ भी न हो तो कही पर गड्ढा खोदकर साफ़ पानी भरकर छठ पूजा का घाट बना सकते है ।
Chhath Pooja सामग्री को सूप में सजाकर रख ले और दौरा में बांध ले साथ में गन्ना को लेकर छठ घाट पे जाया जाता है । व्रती साफ़ और नए कपडे पहनकर घाट पर जाती है ।
घाट पे पहुच कर सूप को बाहर निकाल ले और धूप पुष्प बत्ती इत्यादि से पूजन करके सूप को सजा कर रख ले अब अर्घ्य काल से पहले व्रती को पानी में उतरकर स्नान करना चाहिए इसके बाद कमर से नीचे सूर्य भगवान की ओर पानी में खड़े होकर हाथ जोड़कर अपने करीबियों के लिए सुख और स्वास्थय के मनोकामना करे । इसके बाद हाथो में सूप में केला एवं अन्य फल, अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें| तत्पश्चात दीप जलाकर सूप में रखें और सूप को दोनों हाथों में थामकर अर्घ्य की तैयारी करे
छठ पूजा दो कालो में किया जाता है । जिसे संध्या अर्घ्य काल ,सूर्योदय अर्घ्य काल कहते है । आइये जाने यह अर्घ्य कैसे दिया जाता है ।



छठ पूजा अर्घ्य विधि । Chhath Pooja Arghay Vidhi

Chhath Pooja में अर्घ्य देने के लिए जल और दूध का इस्तेमाल किया जाता है । छोटे पात्र में जल अथवा दूध लेकर सूर्य भगवान की अस्तुति इन मंत्रो
ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

से करते हुवे जाप करे और 2 -5 बार सूप की छोर पर जल छोडे और धूप बत्ती दिखाते हुवे अपने और अपनों के सुख और स्वास्थ्य के लिए माँ छठ और भगवान सूर्य से मनोकामना करे

छठ पूजा सूर्योदय अर्घ्य विधि

इसके बाद घर लौटकर अगले (चौथे) दिन यानि की चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले छठ का डाला लेकर घाट पर पहुँचे संध्या अर्घ्य की तरह ही सूर्योदय अर्घ्य की तैयारी करे । अंत में व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत की पूर्णावति करे।

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