Anemia : Causes, Symptoms,Treatment in Hindi | खून की कमी का इलाज


Anemia : Causes, Symptoms,Treatment in Hindi, एनीमिया, रक्तअल्पता अथवा रक्त की कमी वैसे तो कोई गंभीर स्वास्थय समस्या नहीं हैं, मगर थोड़ी लापरवाही बरतने की वजह से ये कई बड़ी और जानलेवा बीमारियों की वजह जरूर बन सकती है। यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखनो को मिलती है। हमारे देश की लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। गर्भवती महिलाओ में रक्त की कमी की समस्या ज्यादा पायी जाती हैं। आइये एनीमिया, रक्तअल्पता अथवा रक्त की कमी के और खून को बढ़ाने, कमजोरी दूर करने के बारे में विस्तार से जाने।
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Anemia : Causes, Symptoms,Prevention and Treatment in Hindi

एनीमिया क्या हैं (Anemia details in Hindi) – हमारा शरीर तीन तरह की ब्लड सेल्स बनाता है- आरबीसी यानी श्वेत रुधिर कणिका, डब्ल्यूबीसी या श्वेत रुधिर कणिका और प्लेटलेट्स। डब्ल्यूबीसी शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाती हैं। प्लेटलेट्स रक्त का थक्का जमाने में मदद करती हैं और आरबीसी का काम आपके पूरे शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाना है।
आयरन हमारे शरीर में आरबीसी का निर्माण करता है। आयरन की कमी से आरबीसी और हीमोग्लोबिलन बनने की क्रिया प्रभावित होती है। इसके प्रभावति होने से कोशिकाओं तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। जब शरीर में आयरन की इतनी कमी हो जाए कि शरीर और दिमाग की काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगे, तो इस स्थिति को एनीमिया या रक्तअल्पता कहते हैं। विभिन्न आयु वर्ग में रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा कितनी होनी चाहिए, इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निम्न मानक निर्धारित किए हैं
• 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चे – 11 ग्राम %
• 6 वर्ष से 12 वर्ष आयु के बच्वे -12 ग्राम %
• 12 वर्ष से ऊपर की लड़की/स्त्री – 12 ग्राम %
• गर्भवती महिला – 11 ग्राम %
• 12 वर्ष से अधिक आयु का लड़का/आदमी – 13 ग्राम %

एनीमिया के प्रकार – Types of Anemia in Hindi

i) अप्लास्टिक (Aplastic) एनीमिया :-अप्लास्टिक एनीमिया रक्त का एक विकार है जिस कारण शरीर की हड्डियों की मज्जा पर्याप्त रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है। इस कारण स्वास्थ्य सम्बंधित कई समस्याएं जैसे एरिथमियास (Arrhythmia – असामान्य दिल की धड़कन), हृदय के आकार में वृद्धि, दिल की विफलता, सक्रमण और रक्तस्त्राव हो सकता है। यह अचानक या धीरे-धीरे विकसित होता है और समय के साथ गंभीर हो जाता है, जब तक कि इसका इलाज नहीं किया जाता है।

ii) हेमोलिटिक (Haemolytic) एनीमिया: हेमोलिटिक एनीमिया तब होता है जब सामान्य जीवन काल के समाप्त होने से पहले ही लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या रक्तधारा में नहीं होती हैं। कई बिमारियों, स्तिथियों और कारकों के कारण शरीर लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है। हेमोलिटिक एनीमिया से कई गंभीर स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं जैसे थकान, दर्द, एरिथमियास (Arrhythmia – असामान्य दिल की धड़कन), हृदय के आकार में वृद्धि, दिल की विफलता हो सकती हैं।

iii) थेलसेमिआस (Thalassaemias): थेलसेमिआस (Thalassaemias) एक अनुवांशिक रक्त विकार है जिस कारण शरीर कम लाल रक्त कोशिकाएं और हीमोग्लोबिन (लाल रक्त कोशिकाओं में एक आयरन युक्त प्रोटीन) बनाता है। थेलसेमिआस के प्रमुख प्रकार हैं: अल्फा थेलसेमिआस और बीटा थेलसेमिआस। थेलसेमिआस पुरुषों और महिलाओं, दोनों में होता है।

iv) सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia): सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर बीमारी है जिसमें शरीर दरांती (सिकल) के आकृति जैसी लाल रक्त कोशिकाएं बनाता है। सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं की आकृति डिस्क (Disk) जैसी होती है जिस कारण वह रक्त वाहिकाओं के ज़रिये आसानी से उत्तीर्ण होता है।

v) परनिशियस (Pernicious) एनीमिया: परनिशियस एनीमिया में शरीर पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है क्योंकि शरीर में पर्याप्त विटामिन B12 (भोजन में पाया जाने वाला पोषक तत्व) नहीं होता है। जिन लोगों को परनिशियस (Pernicious) एनीमिया होता है वह शरीर में एक प्रकार के प्रोटीन की कमी के कारण पर्याप्त विटामिन B12 का अवशोषण नहीं कर पाते हैं।

vi) फेंकोनाइ (Fanconi) एनीमिया या ऍफ़ए (FA) एक अनुवांशिक रक्त विकार है जिस कारण हड्डियों की मज्जा की विफलता हो सकती है। ऍफ़ए (FA), अप्लास्टिक एनीमिया का एक प्रकार है जो हड्डियों की मज्जा को नई रक्त कोशिकाएं नहीं बनाने देता है। ऍफ़ए (FA) के कारण हड्डियों की मज्जा कई असामान्य रक्त कोशिकाएं बनाता है। इस कारण लेउकीमिअ जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

vii) आयरन की कमी के कारण एनीमिया: एक सामान्य प्रकार है जो आमतौर पर तब होता है जब बहुत समय से मासिक धर्म के कारण खून की अत्यधिक कमी हो रही होती है। गर्भावस्था में भ्रूण (फीटस) के विकास और, बच्चो में बचपन और किशोरावस्था में विकास के लिए आयरन की ज़्यादा ज़रुरत के कारण भी आयरन की कमी के कारण एनीमिया हो सकता है।




एनीमिया का परीक्षण – Diagnosis of Anemia in Hindi

i) कम्प्लीट ब्लड टेस्ट(Complete blood count (CBC)) :- इसमें रक्त के नमूने में कोशिकाओं की संख्या मापा जाता है। एनीमिया का निदान करने के लिए डॉक्टर आपके रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं (हेमाटोक्रिट; Hematocrit) और हीमोग्लोबिन के स्तर देखते हैं। हेमाटोक्रिट का स्तर पुरुषों में 40-52 प्रतिशत होते हैं और महलाओं में 35-47 प्रतिशत होता है। पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 14-18 ग्राम/ डेसिलीटर होता है और महिलाओं में 12-16 ग्राम/ डेसिलिटर होता है।
ii) आपके लाल रक्त कोशिकाओं के रंग, आकर और आकृति जानने के लिए भी टेस्ट किया जा सकता हैं।
iii) हड्डियों के मज्जा के नमूने की भी ज़रुरत पड़ सकती है।
iv) विटामिन बी 12 और फोलेट के स्तर जानने के लिए जाँच की जा सकती है – जो की लाल रक्त कोशिका उत्पादन के लिए आवश्यक विटामिन हैं।
v) रक्त में आयरन का स्तर और आपके सीरम फेरिटीन स्तर की जाँच की जा सकती है,जो की आपके शरीर में मौजूद आयरन की मात्रा बताने सबसे अच्छा संकेतक हैं
vi) रेटिकुलोसाइट कॉउंट, बिलीरुबिन, और अन्य रक्त और मूत्र परीक्षण, यह निर्धारित करने के लिए कि आपके रक्त कोशिकाओं को कितनी जल्दी बनाया जा रहा है
vii) एनीमिया के दुर्लभ कारणों की पहचान करने के लिए विशेष रक्त परीक्षण, जैसे आपके लाल रक्त कोशिकाओं पर प्रतिरक्षा प्रतिघात, लाल रक्त कोशिका की कमजोरी, एंजाइमों, हीमोग्लोबिन, और थक्के के दोष जानने के लिए

एनीमिया होने के मुख्य कारण – Causes of Anemia in Hindi

एनीमिया क्यों होता हैं – Anemia reasons in Hindi, एनीमिया रक्त से जुड़ी समस्या है। इसके कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे-
i) रक्त में आरबीसी का कम बनना,
ii) हेमरेज या ज्यादा खून बह जाना,
iii) आयरन की कमी,
iv) विटामीन बी-12 की कमी: शरीर में विटामीन बी-12 की कमी से परनीसीयस एनीमिया होने की संभावना होती है। परनीसीयस एनीमिया ज़्यादातर शुद्ध शाकाहारी व्यक्तियों को और लंबे व़क्त से शराब का सेवन करने वालों को होता है।
v) किडनी कैंसर: किडनी से इरायथ्रोपोयॅटीन (Erythropoietin) नाम के हारमोन का उत्पादन होता है जो अस्थिमज्जा (Bone Marrow) को रेड-ब्लड सेल के निर्माण में मदद करता है। जिन लोगों को किडनी का कैंसर होता है उनके शरीर मेँ इरायथ्रोपोयॅटीन हारमोन का निर्माण नहीं होता है और इसकी वजह से रेड-ब्लड सेल्स का बनना भी कम हो जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को एनीमिया हो जाता है
vi) हरी सब्जिियां कम या बिल्कुल न खाना।
vii) रक्तस्राव से होने वाला एनीमिया: माहवारी (पीरियड्स) के दिनों में बहुत ज्यादा स्राव, किसी चोट या घाव से स्राव, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल अल्सर, कोलन कैंसर आदि में लगातार धीरे-धीरे ख़ून रिसने से भी एनीमिया हो सकता है।
viii) थैलैसीमीया: थैलैसीमीया आनुवांशिक एनीमिया होता है। इस प्रकार के एनीमिया में हीमोग्लोबिन अपेक्षित मात्रा में बनने के बजाय कम या ज्यादा बनने लगता है।
ix) वायरल इंफेक्शन, कीमोथेरेपी: वायरल इंफेक्शन, कीमोथेरेपी और कुछ दवाएं लेने से भी बोनमेरो (Bone Marrow ) बुरी तरह से प्रभावित होती है। और इससे ब्लड सेल्स का निर्माण बिल्कुल कम हो जाता है। जिसकी वजह से एनीमिया होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। इस तरह के एनीमिया को अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia) कहते हैं।
x) प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य गतिविधि (नवजान शिशु में हेमोलिटिक (Hemolytic) बीमारी जो गर्भवती महिला के भ्रूण (फीटस) में होती है)।
xi) वेस्कुलर ग्राफ्ट (Vascular Graft), हार्ट वॉल्व में समस्या, ट्यूमर, जलने के कारण समस्या, रसायनों के संपर्क में आने से समस्याएं,उच्च रक्तचाप, रक्त के थक्कों का विकार के प्रभाव से भी खून की कमी हो सकती है।
xii) इन्फेक्शन, हानिकारक पदार्थों का प्रभाव और कुछ दवाओं के प्रभाव से भी ये बीमारी हो सकती है। ए-प्लास्टििक एनीमिया बहुत कम केसों में होता है, लेकिन ये जानलेवा बीमारी है।

एनीमिया होने के मुख्य लक्षण – Symptoms of Anemia in Hindi

शरीर में रक्त की कमी और एनीमिया होने के संकेत और लक्षण (Signs of Anemia in Hindi) आपको हुए एनीमिया के प्रकार पर निर्भर करेंते हैं सामान्यतः शरीर में रक्त की कमी व एनीमिया रहने पर सिरदर्द, पैरों मे दर्द, जीभ में जलन, हल्का बुखार, गला सूकना, बाल गिरना, मुंह में छाले पड़ना, नाखून पीले पड़ जाना और सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी से चक्कर आना जैसी शिकायतें देखनो को मिलती हैं। बच्चों में पेट में कीड़े होने पर उनमें एनीमिया की शिकायत देखने को मिलती है। ऐसे में वह चिड़चिड़े हो जाते हैं और रोते रहते हैं।
अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड टेस्ट तुरंत कराएं




एनीमिया से बचाव के तरीके – Prevention of Anemia in Hindi

शरीर में रक्त की कमी और एनीमिया होने से कैसे बचा जाये इससे जुड़े कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी हासिल करे हालाँकि एनीमिया के कुछ प्रकारों जैसे सिकल (Sickle) सेल एनीमिया (जो एक अनुवांशिक बीमारी है) से बचा नहीं जा सकता है।
i) खाने में ऐसी चीजें शामिल करें जिनमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता हो। इसके लिेए चुकंदर, गाजर, टमाटर, पत्तागोभी, हरी सब्जिियां अपनी डाइट में शामिल करें।
ii) ऐसा माना जाता है किल लोहे की कढ़ाई में खाना पकाकर खाने से भी शरीर को आयरन मिलता है।
iii) चाय और कॉफ़ी का सेवन कम करें क्योंकि इनके कारण आपके शरीर को आयरन का अवशोषण करने में परेशानी हो सकती है।
iv) विटामिन सी (C) का सेवन ज़्यादा करें क्योंकि वह आयरन का अवशोषण करने में मदद करता है।
v) दुर्घटनाएं और चोटें अप्रत्याशित हैं। यदि आप किसी ऐसी स्तिथि में हों जब आप अधिक खून बह रहा हो तो जब तक आपको कोई चिकित्सक मदद ना मिलें तब तक आपको अपने रक्तस्त्राव को रोकने या कम करने की कोशिश करें।

एनीमिया और रक्त की कमी का घरलू इलाज – Home remedies for Anemia in Hindi

i) रक्त की कमी को दूर करने के लिए चुकंदर / बीटरूट का रस भी लाभकारी होता है। आप इसमें स्वादानुसार शहद भी मिला सकते हैं।
ii) रक्त की कमी को दूर करने के लिए गुड और मूंगफली के दानों का मिश्रण बेहद कारगर साबित होता हैं। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ स्वादिष्ठ भी होता हैं।
iii) हरी पत्तेदार सब्जी जैसे पालक, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं। इनके सेवन से वजन कम होने के साथ खून भी बढ़ता है और पेट भी ठीक रहता है।
iv) खजूर भी आयरन बहुत अच्छा स्त्रोत है। सौ ग्राम खजूर में 90 मिलीग्राम आयरन की मात्रा होती है। दो खजूर को एक कप दूध में रात भर के लिए छोड़ दें। इन खजूर को सुबह खाली पेट चबा चबाकर खाएं। बचे हुए दूध को भी पी लें।
v) चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और एंटासिड दवाओं का सेवन कम करे। इन चीजों से पेट में लोह तत्व का अवशोषण / absorption होने में दिक्कत आती हैं।
vi) जामुन और आंवले के रस को समान मात्रा में मिलाकर पिने से लाभ होता हैं।
vii) सूखे मेवे जैसे खजूर, बादाम और किशमिश का खूब प्रयोग करना चाहिए। इसमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है।
viii) अनार शरीर में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) को बहुत तेजी से बढ़ाता है। अनार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की उच्च मात्रा होती है। इसमें आयरन और कैल्शियम भी होता है। यह खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा को तेजी से बढ़ाकर रक्त संचार को ठीक रखता है। एनीमिया के उपचार के लिए सुबह खाली पेट अनार खाएं और रोजाना अनार का जूस पीएं।

एनीमिया और रक्त की कमी का इलाज – Treatment for Anemia in Hindi

आपको हुए एनीमिया का उपचार आपको हुए एनीमिया के प्रकार पर निर्भर करेगा:

i) आयरन की कमी के कारण हुए एनीमिया : एनीमिया के इस प्रकार का उपचार आप आयरन में युक्त आहार लेकर और अपनी आहार में कुछ बदलाव लाकर कर सकते हैं। यदि आयरन की कमी के कारण हुए एनीमिया मासिक धर्म की वजह से ना हुआ हो और इसका कारण कोई रक्तस्त्राव हो तो सर्जरी भी करनी पड़ सकती है।
ii) विटामिन की कमी के कारण हुआ एनीमिया : विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी के कारण हुए एनीमिया का उपचार आहार में बदलाव लाकर, विटामिन B12 और फोलिक एसिड में युक्त आहार का सेवन करके किया जा सकता है।
iii) लंबे समय से चल रही बीमारी के कारण एनीमिया : इस प्रकार के एनीमिया का कोई उपचार नहीं होता है। डॉक्टर आपको चल रही बीमारी का उपचार करने की कोशिश करते रहेंगे। यदि आपको हो रहे लक्षण गंभीर हो जाए तो आपका रक्त-आधान किया जाएगा या आपको कृत्रिम एरिथ्रोप्रोटीन (Synthetic Erythropoietin; एक प्रकार का प्रोटीन जिसका उत्पादन आपके गुर्दों में होता है) के इंजेक्शन दिए जाएंगे जिससे लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाया जा सके और आपको हो रहे लक्षणों का उपचार किया जा सके।
iv) अप्लास्टिक (Aplastic) एनीमिया: अप्लास्टिक एनीमिया के उपचार के लिए रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं के स्तर को बढ़ाने के लिए रक्त-आधान करने की आवश्यकता हो सकती है। यदि आपकी हड्डियों के मज्जा में कोई समस्या हो जिस कारण वह स्वस्थ रक्त कोशिकाएं ना बना पा रहा हो तो आपको हड्डियों की मज्जा का प्रत्यारोपण करने की भी आवश्यकता हो सकती है।
v) हड्डियों की मज्जा से सम्बंधित एनीमिया: ऐसे एनीमिया के उपचार के लिए आपको दवाइयों, कीमोथेरपी, या हड्डियों की मज्जा का प्रत्यारोपण करने की आवश्यकता हो सकती है।
vi) हेमोलिटिक (Hemolytic) एनीमिया: एनीमिया के उपचार के लिए जिन दवाइयों के कारण हेमोलिटिक एनीमिया हो सकता है, प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो सकती है या जो दवाइयाँ आपकी लाल रक्त कोशिकाओं को हानि पहुँचा सकती हों उनका सेवन ना करें और हेमोलिटिक एनीमिया से सम्बंधित संक्रमणों का इलाज करवाएं।
vii) सिकल (Sickle) सेल एनीमिया: इस प्रकार के एनीमिया के उपचार में ऑक्सीजन, दर्द निवारक दवाइयाँ, दर्द और जटिलताओं को कम करने के लिए मौखिक और नसों के माध्यम से दी जाने वाली दवाइयाँ की आवश्यकता हो सकती है। डॉक्टर आपको रक्त-आधार, फोलिक एसिड युक्त भोजन और एंटीबायोटिक लेने की सलाह दे सकते हैं। कुछ स्तिथियों में हड्डियों की मज्जा का प्रत्यारोपण प्रभावी हो सकता है। कैंसर की कुछ दवाइयाँ जैसे हाइडरिआ (Hydrea) सिकल (Sickle) सेल एनीमिया में उपयोगी हो सकती है।
viii) थैलेसीमिअ (Thalassemia): इस प्रकार के एनीमिया का उपचार रक्त-आधार, फोलिक एसिड में युक्त भोजन, दवाइयों, स्प्लीन के निष्कासन और हड्डियों की मज्जा के प्रत्यारोपण से किया जा सकता है।

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज – Ayurvedic Treatment of Anemia in Hindi

एनीमिया और खून की कमी के लिए आयुर्वेदिक इलाज भी काफी कारगर साबित हो सकता हैं।
i) पुनर्नवा : पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण, मुनक्का और हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर 1 चम्मच की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम 1 कप दूध के साथ सेवन करने से खून की कमी के रोग में लाभ होता है।
ii) गिलोय : एक चौथाई ग्राम की मात्रा में गिलोय (गुर्च) शहद और गुड़ के साथ सुब-शाम सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।
iii) कलौंजी : एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबालकर छान लें और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर, रोज भूखे पेट सुबह व रात में सोते समय 21 दिन तक सेवन करें। खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग न करें।
iv) कूठ के चूर्ण : आधा से दो ग्राम कूठ के चूर्ण मेंघी व शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में खून बढ़ता है।
v) चित्रक : चित्रक की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर कूट-पीसकर रखें। इसके चूर्ण में 100 मिलीलीटर चित्रक का रस निकालकर मिला लें। यह मिश्रण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खून की कमी दूर हो जाती है।
vi) पित्तपापड़ा : एक तिहाई कप के पानी में पित्तपापड़ा को मिलाकर पीने से खून की कमी के रोग में लाभ होता है।
vii) सत गिलोय : सत गिलोय लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग घी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम देने से खून के रोग में लाभ होता है।
viii) सहजन : सहजन के पत्तों को तोड़कर उसकी सब्जी बनाकर खाने से शरीर में लौह (आयरन) तत्व की कमी दूर होती है और शरीर में खून की कमी के कारण होने वाली बीमारी खत्म होती है।

एनीमिया का होम्योपैथिक इलाज -Homeopathic Treatment of Anemia in Hindi

रक्तहीनता की स्थिति में एवं रक्तहीनता से होने वाली अन्य बीमारियों में होमियोपैथिक औषधियां अत्यंत फायदेमंद हैं। प्रमुख औषधियां निम्न हैं – ‘फेरममेट’, ‘चाइना’, ‘नेट्रमम्यूर’, ‘कैल्केरिया फॉस’, ‘आर्सेनिक’,’ टी. एन. टी.’।

i) कैलकेरिया फॉस : खून की कमी होने पर तथा शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए रोगी को कैलकेरिया फॉस औषधि की 6X का सेवन कराना हितकारी होता है।
ii) चायना (सिनकोना) :- यदि श्वेतप्रदर के कारण, अधिक मात्रा में वीर्य के नष्ट होने के कारण, रक्तस्राव या अतिसार के कारण खून की कमी हो गई हो तो चायना औषधि की 3 शक्ति या फास्फोरस की 3 शक्ति का उपयोग करने से लाभ होता है।
iii) सीपिया : खून की कमी (रक्त हीनता) तथा हरित रोग दोनों में रोगों में सीपिया औषधि का प्रयोग किया जाता है।
iv) Ferrum Phosphoricum 3x – हीमोग्लोबिन की कमी या रक्तस्राव के कारण होने वाले खून की कमी में बहुत अच्छा काम करती है।
v) Natrum Muriaticum 6x – यह दवा पशु और वनस्पति के ऊतकों में पाया जाने वाला प्रोटीन है जोकि लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में बहुत कारगर है।
vi) फेरम-फॉस 12x –यदि रक्त के लाल कण यथेष्ट मात्रा में न बढ़ें तो इसका प्रयोग करना ठीक रहता है।

एनीमिया का एलोपैथिक इलाज -Allopathic Medicine of Anemia in Hindi

खून की कमी और खून को बढ़ाने, कमजोरी दूर करने का एलोपैथिक दवा निम्नलिखित हैं।

i) माइक्रोसूल्ज (Microsules) (निर्माता : यूनिल्वाइड्स) – इस नाम से प्राप्य कैप्सूल में विटामिन B1, B2, B6, B12, नियासिनामाइड, विटामिन सी और फेरस फुमेरेट है। यह रक्ताल्पता (खून की कमी) में गुणकारी है। वयस्कों को 1-1 कैप्सूल प्रतिदिन 2 बार दें।
ii) प्रोबोफेक्स (Probofex) (निर्माता : वाकहर्डट) – इसमें विटामिन B6, B12, फोलिक एसिड, फेरस अमिनोऐट, प्रोटीन हाइड्रोलायसेट है । यह औषधि सीरप के रूप में उपलब्ध है। जो समस्त प्रकार की रक्ताल्पता, गर्भावस्था तथा दूध पिलाने की अवस्था में लाभकारी है। यह शारीरिक दुर्बलता तथा बुढ़ापे के कष्ट एवं निर्बलता में भी लाभप्रद है । वयस्कों को 15 मि.ली. तथा बच्चों को 5 मि.ली. प्रतिदिन सेवन करायें ।
iii) नियोफेरिलेक्स एस० (Neo Ferilex-s) (निर्माता : रैलीज) – इसमें आयरन, कोलीन साइट्रेट, विटामिन B1, B2, B6, B12, निकोटिनामाइड, फोलिक एसिड, डी. एल. पेण्टोथेनेट, अल्कोहल, लायसिन मोनो हाइड्रोक्लोराइड है जो तरल रूप में प्राप्य है । यह औषधि विभिन्न कारणों से उत्पन्न रक्ताल्पता एवं दुर्बलता में लाभप्रद है ।
वयस्कों को 5 से 10 मि.ली. समान भाग जल मिलाकर भोजनोपरान्त दिन में 2-3 बार पिलायें ।

नोट: ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक है अतः दवा डॉक्टर से पूछे बिना कतई न लें।

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Reference From
www.myupchar.com

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