होली, होलिका दहन कब, क्यों और कैसे मनाया जाना चाहिए ?


Why, When and How We Celebrate Holi and Holika Dahan in Hindi, होली बसंतोत्सव के रूप में फाल्गुन मास कि पूर्णिमा के दिन रंग-गुलाल से मनाये जाने वाला भारतवर्ष में हिन्दुओ का बहुत हर्षो उल्लास का त्योहार है | फाल्गुन मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का अंतिम मास होता है । मुख्य रूप से यह हिन्दू धर्म के लोगों के साथ साथ भारत, नेपाल तथा विश्व के अन्य क्षेत्रों में भी मनाया जाता है | इसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है । प्राचीन काल में होली केवल फूलों से, या फूलों से बने रंगों से ही खेलने का प्रचलन था । परंतु आधुनिक समय में रंगों एवं गुलाल से होली खेलने का प्रचलन बढ़ गया है ।
होली के बारे में विस्तार पूर्वक जानने से पहले 2018 में होली से जुड़े महत्वपूर्ण तिथि के बारे में जान लेना आश्यक है |
होलिका दहन तिथि – 1 मार्च 2018
होलिका दहन मुहूर्त – 18:16 से 20:47
भद्रा पूंछ – 15:54 से 16:58
भद्रा मुख – 16:58 से 18:45
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 08:57 बजे (1 मार्च 2018)
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 06:21 बजे (2 मार्च 2018)
रंगवाली होली – 2 मार्च 2018

Why we Celebrate Holi in Hindi




About Holi in Hindi | होली कितनो दिनों का त्योहार है?

होली एक दिन का त्यौहार नहीं है । कई जगह यह तीन दिन तक हर्षो उल्लाश के साथ मनाया जाता है।

दिन 1 – पूर्णिमा के दिन एक थाली में रंगों को सजाया जाता है और परिवार का सबसे बड़ा सदस्य बाकी सदस्यों पर रंग छिड़कता है।
दिन 2 – इसे पूनो भी कहते हैं। इस दिन होलिका के चित्र जलाते हैं और होलिका और प्रहलाद की याद में होली जलाई जाती है। अग्नि देवता के आशीर्वाद के लिए मांएं अपने बच्चों के साथ जलती हुई होली के पांच चक्कर लगाती हैं।
दिन 3 – इस दिन को ‘पर्व’ कहते हैं और यह होली उत्सव का अंतिम दिन होता है। इस दिन एक दूसरे पर रंग और पानी डाला जाता है । भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों पर भी रंग डालकर उनकी पूजा की जाती है।

Holika Pujan Vidhi in Hindi | होलिका पूजन विधि

लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं। इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें।

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why we celebrate Holika dahan in Hindi | होलिका दहन क्यों मनाया जाता है ?

About Holika dahan in Hindi , जैसा की हमे पता है की होली की शुरुवात होलिका दहन से होती है । होली के एक दिन पूर्व मनाये जाने वाले होलिका दहन के बारे में जानकारी रखना अहम हो जाता है । प्रह्लाद और होलिका का प्रसंग तो लगभग सभी लोग जानते हैं। माना जाता है कि होली पर्व का प्रारंभ प्रह्लाद और होलिका से जुड़ा है।
विष्णु पुराण के अनुसार होलिका एक राक्षिसा थी जिसे भगवान से वरदान प्राप्त था कि, वह आग में नहीं जलेगी । होलिका का भाई हिरण्यकश्यप जिसका पुत्र प्रह्लाद था जो की भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था । जो की उनके पिता हिरण्यकश्यप को कतई पसंद नहीं था, इसी द्वेष के कारण हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से उनको जलाकर मारने की युक्ति बनाई । लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठी तो परन्तु होलिका का वरदान निष्फल सिद्ध हुआ और वह स्वयं उस आग में जल कर मर गई ।
तभी से लोगो ने इस, बुराई की अच्छाई के जीत को होलिका दहन के त्योहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया |

Why we celebrate Holi in Hindi | होली क्यों मनाया जाता है ?

Holi Details in Hindi, होली मनाने के लिए विभिन्न वैदिक व पौराणिक मत हैं। वैदिक काल में इस पर्व को ‘नवान्नेष्टि’ कहा गया है। इस दिन खेत के अधपके अन्न का हवन कर प्रसाद बांटने का विधान है। होली शब्द “होला” शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है नई और अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए भगवान की पूजा । इस अन्न को होला कहा जाता है, इसलिए इसे होलिकोत्सव के रूप में मनाया जाता था। इस पर्व को नवसंवत्सर का आगमन तथा बसंतागम के उपलक्ष्य में किया हुआ यज्ञ भी माना जाता है। कुछ लोग इस पर्व को अग्निदेव का पूजन मात्र मानते हैं। मनु का जन्म भी इसी दिन का माना जाता है। अत: इसे मन्वादितिथि भी कहा जाता है।



एक अन्य कथा शिव पुराण के अनुसार, भगवान शंकर ने अपनी क्रोधाग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था,शिव जी की तपस्या भंग होने के बाद देवताओं ने शिव को पार्वती से विवाह के लिए राजी कर लिया। इस कथा के आधार पर होली में काम की भावना को प्रतीकात्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम की विजय का उत्सव मनाया जाता है । तभी से यह त्योहार मनाने का प्रचलन हुआ।

होली का त्यौहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा है। बसंत में एक-दूसरे पर रंग डालना श्रीकृष्ण लीला का ही अंग माना गया है। मथुरा-वृंदावन की होली राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में डूबी होती है। बरसाने और नंदगांव की लठमार होली जगप्रसिद्ध है। होली पर होली जलाई जाती है अहंकार की, अहं की, वैर-द्वेष की, ईर्ष्या की, संशय की और प्राप्त किया जाता है विशुद्ध प्रेम।

When we celebrate Holi in Hindi | होली कब मनाया जाता है ?

होली का त्यौहार हर साल चंद्र मास, फाल्गुन की पूर्णिमा के अंतिम दिन, गर्मी के मौसम की शुरुआत और सर्दियों के मौसम के अंत में, बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है । फाल्गुन मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का अंतिम मास होता है परंपरागत रूप से, यह बुराई की सत्ता पर या बुराई पर अच्छाई की सफलता के रुप मे मनाया जाता है। यह “फगवाह” के रूप में नामित किया गया है, क्योंकि यह हिन्दी महीने, फाल्गुन में मनाया जाता है।

How to Play Safe Holi in Hindi | सुरक्षित होली मनाने का तरीका ?

✪ होली जलाने के लिए जलाऊ लकड़ी का इस्तेमाल करें और यह मात्र प्रतीकात्मक हो।
✪ होलिका दहन में कपूर का उपयोग करे जिससे की हवा में मौजूद वक्टेरिया नष्ट हो जाये
✪ केमिकल वाले रंगों के इस्तेमाल से बचे।
✪ रंगों से स्किन और बालो को बचाये
✪ रंगों के लिए पारिजात, टेसू के फूलों से बने रंगों को उपयोग में लाएं।
✪ अगर पानी से होली खेलना ही है तो साधारण पानी का इस्तेमाल कर होली खेलें ।

Eco-friendly Holi celebration tips in hindi | इको फ्रेंडली होली कैसे मनाएं :

फूलों और उनकी पंखुड़ी से होली का पर्व मनाया जा सकता है। पलाश के फूलों से तैयार किया गया रंग, हल्दी और बेसन से बने रंगों को होली खेलने में इस्तेमाल कर सकते हैं। ग्वारपाठा (एलोवीरा) के कांटे निकालकर उसे पीस लें और फिर हरे रंग के पेस्ट का इस्तेमाल करें। इसमें नीम की पत्तियों का पेस्ट भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

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