Raksha Bandhan in Hindi | रक्षा बंधन पूजन विधि, शुभ मुहूर्त – 2017


raksha bandhan shubh muhurat puja vidhi in hindi

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Raksha Bandhan Shubh Muhurat 2017 in Hindi, रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य के सम्बन्ध को समर्पित है यह त्योहार बहन के प्रति भाईयों के दायित्वों का बोध कराता हैं। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है।




Raksha Bandhan Shubh Muhurat and Pujan Vidhi in Hindi

रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। किसी भी काम का शुभारंम अच्छे मुहूर्त में करना चाहिए। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य का परिणाम भी अच्छा आता है। मंगल मुहूर्त में भाई की कलाई पर राखी बाँधने से भाई की उन्नति, आयु व आय में वृद्धि होती है। आइये रक्षा बंधन पूजन विधि, शुभ मुहूर्त 2017 (Raksha Bandhan Shubh Muhurat) और रक्षाबंधन के महत्व के बारे में विस्तार पूर्वक जाने।

Raksha Bandhan Shubh Muhurat in Hindi 2017

रक्षा बन्धन अनुष्ठान का समय – 11:04am to 9:12pm (10 Hours 8 Mins)
रक्षा बन्धन के लिये अपराह्न का मुहूर्त –1:46pm to 4:24pm (2 Hours 38 Mins)
रक्षा बन्धन के लिये प्रदोष काल का मुहूर्त –7:03pm to 9:12 pm (2 Hours 9 Mins)
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 6/Aug/2017-10:28 pm
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 7/Aug/2017-11:40 pm
भद्रा पूँछ – 06:40 am to 07:55 am
भद्रा मुख – 07:55 am to 10:01 am
भद्रा अन्त समय – 11:04 am

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अपराह्न का समय रक्षा बन्धन के लिये अधिक उपयुक्त माना जाता है जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के बाद का समय है। यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि की वजह से उपयुक्त नहीं है प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना जाता है।भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना जाता है।
7 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है, वहीं भद्रा और चंद्र ग्रहण भी है। चंद्र ग्रहण रात 10.53 बजे से शुरू होगा। इसका मोक्षकाल देर रात 12.48 बजे तक होगा। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 1.53 बजे से शूतक लग जाएंगे, वहीं सुबह 11.04 बजे तक भद्रा काल का असर रहेगा। चूंकि सूतक और भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित हैं, इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। सुबह 11.05 बजे से लेकर 1.52 मिनट (करीब 3 घंटे) तक आप Raksha Bandhan का त्योहार मना सकते हैं।




Raksha bandhan shubh muhurat puja vidhi in hindi

बहनों के लिए राखी बांधने की विधि
i) प्रातः काल में स्नानादि कर भाई-बहन तैयार हो जाएँ।
ii) रोली, चांडाल, चावल, घी का दिया, मिष्ठान और राखी से थाल सजाएँ। (पूजा थाली में अपने अनुसार सामग्री घटा-बढ़ा सकते हैं।)
iii) भाई की आरती उतारें।
iv) भाई के मस्तक पर तिलक करें।
v) अब निम्न मंत्र के साथ भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधें और उनकी लंबी उम्र की कामना करें: –

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

भाईयों के लिए रस्में
i) राखी बंधवाने के बाद भाई बहन को रक्षा का आशीर्वाद एवं उपहार व गिफ्ट भेट करे

रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

i)देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है। इस तरह रक्षाबंधन कि शुरुआत हुई मानी जाती है।

ii) भगवान ने तीन पग में सारा आकाश पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकनाचूर कर देने के कारण यह त्योहार बलेव नाम से भी प्रसिद्ध है।. कहते हैं एक बार बाली रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया।. भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबंधनबांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति भगवान बलि को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। ईस प्रसंग से भी रक्षाबंधन अस्तित्व मे आया माना जाता है।

iii) महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि जब ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। इस समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बाँधने के कई उल्लेख मिलते हैं।

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