Piles causes, symptoms and Types in Hindi | बवासीर के कारण, लक्षण और प्रकार


Piles causes, symptoms and Types in Hindi

Piles causes, symptoms and Types in Hindi

Piles causes, symptoms and Types in Hindi, बवासीर जिसे medical भाषा में (Hemorrhoids / पाइल्स या मूलव्याधि) के नाम से जाना जाता हैं और आम बोल चाल के भाषा में खूनी और बादी बवासीर के नाम से जाना जाता है। यह मलद्वार (गुदाभाग / Anus) में होनेवाली एक बेहद पीड़ादायक बीमारी है। अंग्रेजी में इसे Hemorrhoids कहा जाता हैं। आयुर्वेद में इसे अर्श नाम दिया गया हैं। बवासीर की समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाया जाता हैं। पहले के समय में यह रोग अधिकतर 50 की उम्र के बाद ही होती थी लेकिन आधुनिक युग की तनावपूर्ण और बिगड़ी हुई जीवनशैली के कारण आज के युवावर्ग में भी यह समस्या देखनो को मिल रही हैं ।




Piles causes, symptoms and Types in Hindi

कई रोगी ऐसे भी है जो शर्म के कारण बवासीर के शुरूआती स्टेज में डॉक्टर के पास नहीं जाते है और जब समस्या बेहद अधिक होती है तब ईलाज कराते हैं। लेकिन लापरवाही की वजह से आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम केंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है।
आज हम इस लेख के माध्यम से बवासीर के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।……
i) Piles Details in Hindi
ii) Piles causes and reason in Hindi
iii) Piles types in Hindi
iv) Piles symptoms and signs in Hindi

What is piles in Hindi | बवासीर किसे कहते हैं?

हमारे शरीर में गुदा (Anus) भाग में रक्त नलिकाए होती है। किसी दबाव या अन्य कारण से गुदाभाग के अंदरुनी और बाहरी भाग और मलाशय के निचले हिस्सों की रक्त नलिकाओ में सूजन आ जाती हैं। वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों में मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं।

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Piles types in Hindi | बवासीर कितने प्रकार के होते हैं?

बवासीर मुख्यतः दो प्रकार (kind of piles in Hindi) की होती हैं।
1) अंदरुनी बवासीर / Internal Hemorrhoids :- अंदरुनी बवासीर जिसे आम बोल चाल की भाषा में भीतरी बवासीर / खूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श के नाम से जानते हैं । खूनी बवासीर हमेशा धमनियों और शिराओं के समूह को प्रभावित करती है। फैले हुए रक्त को ले जाने वाली नसें जमा होकर रक्त की मात्रा के आधार पर फैलती हैं तथा सिकुड़ती है। इस रोग में गुदा की भीतरी दीवार में मौजूद ख़ून की नसें सूजने के कारण तनकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमज़ोरी आ जाती है और मल त्याग के वक़्त ज़ोर लगाने से या कड़े मल के रगड़ खाने से ख़ून की नसों में दरार पड़ जाती हैं और उसमें से ख़ून बहने लगता है। गुदा के अंदर होने के कारण कई बार रोगी को पता भी नहीं चलता है की वह इस समस्या से पीड़ित हैं। तीव्रता के अनुसार इसे 4 भागो में वर्गीकृत किया गया हैं

i) प्रथम स्टेज (first stage)- इस परिस्थिती में गुदा के अंदर रक्त नलिकाओं में छोटी से सूजन होती हैं। इसमें दर्द नहीं होता हैं। कब्ज या अन्य कारणों से कभी मलत्याग करते समय अधिक जोर लगाने पर मरीज के गुदा भाग से मल के साथ खून आ जाता हैं।
ii) दूसरी स्टेज (Second Stage) – इस स्टेज में सूजन थोड़ी ज्यादा होती हैं। मलत्याग करते समय जोर लगाने पर खून के साथ मस्से भी बाहर आ जाते हैं। मलत्याग करने पर यह अपने आप अंदर चले जाते हैं।
iii) तीसरी स्टेज (Third Stage)- इस स्टेज में सूजन अधिक होती हैं। मलत्याग करते समय मल के साथ खून और मस्से बाहर आ जाते है। मलत्याग करने के बाद उनको हाथ से अंदर करने पर ही गुदा के अंदर जाते हैं।
iv) चौथी स्टेज (fourth Stage)- इसमें पीड़ा बेहद ज्यादा होती हैं। मल त्याग करते समय जोर लगाने पर खून आता है और मस्से बाहर आ जाते है जो हाथ से अंदर धकेलने पर भी जल्दी अंदर नहीं जाते हैं।




2) बाहरी बवासीर / External Hemorrhoids – जिसे आम बोल चाल की भाषा में बाहरी / बादी बवासीर / अरक्‍त स्रावी या ब्राह्य अर्श बादी बवासीर के नाम से जानते हैं । बवासीर की वजह से पेट बराबर खराब रहता है। पेट में कब्ज और गैस की समस्या भी बराबर बनी रहती हैं। जलन, दर्द, खुजली, शरीर मै बेचैनी, काम में मन न लगना जैसी समस्या से रोगी को जूझना पड़ता हैं। इसमें मस्सा अन्दर होता है। मस्सा अन्दर होने की वजह से पखाने का रास्ता छोटा पड़ता है और चुनन फट जाती है और वहाँ घाव हो जाता है उसे डाक्टर अपनी जवान में फिशर भी कहते हें। जिससे असहाय जलन और पीडा होती है। बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है। जिसे अंग़जी में फिस्टुला कहते हें। भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है। और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम केंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है। ऐसे समय तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। गुदाभाग से खून आना यह आंत के कैंसर की निशानी भी हो सकता है इसलिए ऐसे समय घरेलु उपचार में समय बर्बाद करने की जगह एक बार डॉक्टर का परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

Piles causes and reason in Hindi | बवासीर के कारण

बवासीर होने की मुख्य वजह हमारी बुरी आदते और खराब जीवनशैली हैं। अन्य बवासीर होने की मुख्य वजह कुछ ऐशे हैं।
i) गर्भावस्था / Pregnancy :-पेट में पल रहे गर्भ के दबाव और शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स में बदलाव के कारण रक्त नलिकाओं पर होने वाले असर के कारण महिलाओ में गर्भावस्था के दौरान बवासीर की समस्या हो सकती हैं।
ii) अनुवांशिकता / Hereditary :- अनुवांशिकता यानि की जो समस्या परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो कुछ व्यक्तिओं में बवासीर की तकलीफ अनुवांशिक कारणों से भी होती हैं।
iii) कब्ज / Constipation :- कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को मल त्याग करने के दौरान जोर लगाना पड़ता है जिसकी वजह से गुदा के आसपास के रक्त नलिकाओं पर निरंतर दबाव पड़ने के कारण बवासीर हो जाता हैं।
कब्ज का कारण लक्षण और घरेलू इलाज

iv) गुदा मैथुन / Anal Sex :- गुदा मैथुन जिसे अप्राकृतिक मैथुन की विधि माना जाता हैं निरंतर गुदा मैथुन की वजह से गुदाभाग के अंदरुनी और बाहरी भाग और मलाशय के निचले हिस्सों की रक्त नलिकाओ में सूजन आ सकती हैं जो की Piles की वजह बन सकती हैं ।
v) बुढ़ापा :- उम्र के साथ-साथ गुदाभाग हॉर्मोन्स में बदलाव के कारण रक्त नलिकाओ में सूजन आ जाती हैं तथा अंदरुनी हिस्सा कमजोर पड़ने के कारण बवासीर हो सकता हैं।
vi) मोटापा / Obesity :- जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक है और पेट काफी बड़ा होता है ऐसे लोगों में पेट के बढ़ते दबाव के कारण भी बवासीर हो सकता हैं।
vii) वजन उठाना / Weight Lifting :- अधिक भार उठाते समय सांस रोककर रखने से गुदाभाग पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से बवासीर की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं।
vii) जीवनशैली / Lifestyle :- हमारी जीवनशैली का हमारे स्वास्थय से सीधा सम्बन्ध होता हैं हमारी खराब जीवन शैली जैसे लम्बे समय तक बैठे रहना या खड़े रहना, शराब, धूम्रपान, तंबाकू,भूख से अधिक खाना, ज्यादा वसायुक्त,तेल-मसाला वाला भोजन बवासीर होने का मुख्य कारण हो सकता हैं।

Piles symptoms and signs in Hindi | बवासीर के लक्षण

आमतौर पर Piles बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होते और तीन-चार दिन में स्वतः ठीक हो जाते हैं। कई बार तो लोगों को पता भी नहीं चलता कि उन्हें पाइल्स हैं। वैसे पाइल्स के यह निम्न लक्षण हो सकते हैं:-
i) उठने, बैठने, चलने पर गुदा के स्थान में अत्यधिक दर्द होना।
ii) रोगी को मल त्यागते समय गुदा वाली जगह पर काफी दर्द होता है और खून भी निकलता है।
iii) गुदा द्वार में सूजन आ जाती है। अन्दर की बवासीर में मस्से बाहर की तरफ लटकने लगते हैं और मल करने में परेशानी होती है। इस कारण रोगी जोर लगता है जिससे उन मस्सों में से खून निकलने लगता है।
iv) शौच के बाद भी ऐसा महसूस होना कि पेट साफ नहीं हुआ है।
v) गुदा के आसपास खुजली होना और वहाँ लाल और सूजन आ जाना।

अभी तक तो आपको यह समझ में आ गया होगा बवासीर क्यों होता है और उसके लक्षणों की जानकारी लेने के बाद, बवासीर को ठीक करने के लिए क्या किया जाना चाहिए और बवासीर से कैसे बचा जा सकता है यह जानने के लिए कृपया यहाँ click करे –बवासीर का अचूक इलाज

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