Govardhan Puja vidhi in Hindi | गोवर्धन (अन्न कूट) पूजा विधि, पूजा मुहूर्त, पूजन सामग्री


Govardhan Puja vidhi in Hindi, गोवर्धन पूजा दीपावली के अगली सुबह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर मनाये जाने वाला हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है । गोवर्धन पूजा के दिन ही बलि पूजा, अन्न कूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी सम्पन्न होते है। इस दिन गेहूँ, चावल जैसे अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन को पकाया जाता है और भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है अमूमन गोवर्धन पूजा का दिन दीवाली पूजा के अगले दिन पड़ता है लेकिन कभी-कभी दीवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अन्तराल हो सकता है। गोवर्धन पूजा का दिन गुजराती नव वर्ष के दिन के साथ मिल जाता है जो कि कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के दौरान मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा उत्सव गुजराती नव वर्ष के दिन के एक दिन पहले मनाया जा सकता है और यह प्रतिपदा तिथि के प्रारम्भ होने के समय पर निर्भर करता है।




Govardhan Puja vidhi in Hindi

धर्मिक मान्यताओ के अनुसार भगवान कृष्ण द्वारा इन्द्र देवता को पराजित कर उनके अहंकार को दूर करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण का इंद्र के मान-मर्दन के पीछे उद्देश्य था कि ब्रजवासी गौ-धन एवं पर्यावरण के महत्व को समझें और उनकी रक्षा करें। महाराष्ट्र में यह दिन बालि प्रतिपदा या बालि पड़वा के रूप में मनाया जाता है। वामन जो कि भगवान विष्णु के एक अवतार है, उनकी राजा बालि पर विजय और बाद में बालि को पाताल लोक भेजने के कारण इस दिन उनका पुण्यस्मरण किया जाता है। यह माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बालि इस दिन पातल लोक से पृथ्वी लोक आता है।

Govardhan Puja Subh Muhurat in Hindi | गोवर्धन (अन्न कूट) पूजा शुभ मूहर्त

हिन्दू कैलेंडर पञ्चाङ्ग के अनुसार गोवर्धन पूजा पूरे भारतवर्ष में 20 अक्तूबर 2017 दिन शुक्रवार को मनाने की तिथि निर्देशित की गयी हैं।

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल शुभ मुहूर्त- 06:28 am से 08 :43 am (अवधि – 2 घंटा 14 मिनट्स )
गोवर्धन पूजा शायंकाल शुभ मुहूर्त- 03:27 pm से 05:42 pm (अवधि – 2 घंटा 14 मिनट्स )
प्रतिपदा तिथि आरंभ- 12:41 am (20 अक्तूबर)
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 01:37 am (21 अक्तूबर)




Govardhan Puja Samagri in Hindi | गोवर्धन (अन्न कूट) पूजा सामग्री

i) गाय का गोबर – गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाने के लिए

ii) लक्ष्मी पूजन वाली थाली , बड़ा दीपक , कलश व बची हुई सामग्री काम में लेना शुभ मानते है। लक्ष्मी पूजन में रखे हुए गन्ने के आगे का हिस्सा तोड़कर गोवर्धन पूजा में काम लिया जाता है।

iii) रोली , मौली , अक्षत

iv) फूल माला , पुष्प

v) बिना उबला हुआ दूध।

vi) 2 गन्ने, बताशे, चावल, मिट्टी का दीया

vii) जलाने के लिए धूप , दीपक ,अगरबत्ती

viii) नैवेद्य के रूप में फल , मिठाई आदि अर्पित करें।

ix) पंचामृत के लिए दूध, दही, शहद, घी और शक्कर

x) भगवान कृष्ण की प्रतिमा

Govardhan Puja Vidhi in Hindi | गोवर्धन (अन्न कूट) सम्पूर्ण एवं सरल पूजन विधि

इस दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना का प्रावधान हैं ।उसके बाद पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थान पर बैठें और अपने कुलदेव का ध्यान करें पूजा के लिए गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनायें। इसे लेटे हुए पुरुष की आकृति में बनाया जाता है । फूल , पत्तियों , टहनियों व गाय की आकृतियों से या अपनी सुविधानुसार उस आकृति को सजायें । और उनके मध्य में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रखे | नाभि के स्थान पर एक कटोरी जितना गड्डा बना लें और वहाँ एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रखे फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट देते हैं।

अब इस मंत्र को पढ़ें

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।

इसके बाद गायों को स्नान कराएं और उन्हें सिन्दूर आदी से सजाएं. उनकी सींग में घी लगाएं और गुड़ खिलाएं. फिर इस मंत्र का उच्चारण करें.

लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु।।

नैवेद्य के रूप में फल , मिठाई आदि अर्पित करें। गन्ना चढायें। एक कटोरी दही नाभि स्थान में डाल कर बिलोने से झेरते है और गोवर्धन के गीत गाते हुवे गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करते हैं । परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व अन्य खील (जौ) लेकर चलते हैं। जल के लोटे वाला व्यक्ति पानी की धारा गिराता हुआ तथा अन्य जौ बोते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।

Govardhan Puja Vrat Katha in Hindi | गोवर्धन (अन्न कूट) व्रत कथा

गोवर्धन पूजा की परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। उससे पूर्व ब्रज में इंद्र की पूजा की जाती थी। मगर भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों को तर्क दिया कि इंद्र से हमें कोई लाभ नहीं प्राप्त होता। वर्षा करना उनका कार्य है और वह सिर्फ अपना कार्य करते हैं जबकि गोवर्धन पर्वत गौ-धन का संवर्धन एवं संरक्षण करता है, जिससे पर्यावरण भी शुद्ध होता है। इसलिए इंद्र की नहीं गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए।

इसके बाद इंद्र ने ब्रजवासियों को भारी वर्षा से डराने का प्रयास किया, पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर सभी गोकुलवासियों को उनके कोप से बचा लिया। इसके बाद से ही इंद्र भगवान की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का विधान शुरू हो गया है। यह परंपरा आज भी जारी है।

सब ब्रजवासी सात दिन तक गोवर्धन पर्वत की शरण मे रहें। सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर एक जल की बूँद भी नही पड़ी। ब्रह्या जी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्री कृष्ण ने जन्म ले लिया है, उनसे तुम्हारा वैर लेना उचित नही है। श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपनी मुर्खता पर बहुत लज्जित हुए तथा भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की।

श्रीकृष्ण ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखकर ब्रजवासियो से आज्ञा दी कि अब से प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व उल्लास के साथ मनाओ।

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jagran.com

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