Dhanteras Pooja Special Tips in Hindi | धनतेरस पूजन विधि और शुभ मुहूर्त


Dhanteras Pooja Special Tips in Hindi, धनतेरस पूजा, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानि दीवाली से 2 दिन पहले मनाया जाता है । मान्यताओ के अनुसार धनतेरस के देवता धनवंतरी के उत्पन्न होने के दो दिनों बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई। इसलिए दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है । असल में दिवाली की शुरुवात धनतेरस पूजा से ही हो जाती है । धनतेरस पूजा के दिन लोग घर के मुख्य द्वार पर दिया जलाते है और अपने हैसियत के अनुसार कई नई चीजे जैसे कोई बर्तन अथवा चाँदी या सोने के सिक्के,आभूषण की खरीदारी करते है । धनतेरस पूजा की मान्यता है कि इस दिन कोई किसी को न ही उधार देते है और न ही लेते है – इसलिए सभी नई वस्तुएं लातें है ।

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Dhanteras Pooja Special Tips in Hindi

धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी, धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती के नाम से भी जानते है। धनतेरस पूजा में देव धनवन्तरी के अलावा माँ लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है । एक प्राचीन कथाओ के अनुसार ऐसा माना जाता है की अगर धनतेरस पूजा के दिन यमदेव को भी दीपदान किया जाए तो घर के किसी भी सदस्य को असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है.

धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त 2017 | Dhanteras Puja Shubh Muhurat 2017

☛ धनतेरस पूजा तिथि : 17 अक्तूबर 2017 , मंगलवार
☛ धनतेरस पूजन मुर्हुत : सायं 07:19 pm बजे से 08:17 pm बजे तक
☛ धनतेरस प्रदोष काल : सायं 05:45 pm से रात्रि 08:17 pm बजे तक
☛ धनतेरस वृषभ काल : सायं 07:19 pm बजे से रात्रि 09:14 pm बजे तक
☛ धनतेरस त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : सायं 12:26 am से, 17 अक्तूबर 2017
☛ धनतेरस त्रयोदशी तिथि समाप्त : सायं 12:08 am बजे, 18 अक्तूबर 2017

Dhanteras Puja kyu manya jata hai | धनतेरस पूजा क्यों मनाया जाता है

प्राचीन मान्यताओ के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरी हाथो में कलश लेकर प्रकट हुए थे । भगवान धन्वंतरी भगवान विष्णु का एक स्वरुप है और देवताओ के चिकित्सक भी है । ऐसा मानना है की अगर धनतेरश की पूजा शुभ मुहूर्त में और पूर्ण विधि विधान से किया जाये तो आपका धन वैभव 13 गुणा बढ़ जाता है और आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ मिलता है । इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है. भगवान धन्वंतरी के हाथो में कलश है इसलिए इस दिन बर्तन या चांदी,सोना खरीदना शुभ माना जाता है

Dhanteras Pooja Special Tips in Hindi

Dhanteras Pooja Special Tips in Hindi




Dhanteras Pujan Vidhi in Hindi | धनतेरस पूजन विधि

इस दिन सर्वप्रथम नहाकर साफ वस्त्र धारण करें तद्पश्चात शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वन्तरि, माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति या फोटो साफ स्थान पर स्थापित करें तथा स्वयं पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं । अब एक कलश में 5 सुपारी, 1 चांदी का सिक्का, दुर्बा घास , हल्दी का टुकड़ा, सम्भव हो तो 13 रत्न, कलश के ऊपर एक प्लेट में चावल रखे और उस पर एक श्रीफल रखे इस प्रकार से कलश स्थापना के बाद कलश की पंचोपचार पूजा करे दीप दान के बाद भोग या नैवेद्य भी अर्पित करे और उसके बाद सर्वप्रथम भगवान धन्वन्तरि का आह्वान निम्न मंत्र से करें-

सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,
अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

इसके पश्चात पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढ़ाएं। इसके बाद आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान धन्वन्तरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का नैवैद्य लगाएं। (अगर चांदी का पात्र उपलब्ध न हो तो अन्य पात्र में भी नैवेद्य लगा सकते हैं।) तत्पश्चात पुन: आचमन के लिए जल छोड़े। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। भगवान धन्वन्तरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वन्तरि को अर्पित करें।

रोग नाश करने के लिए कामना करे और इस मंत्र का जाप करें-

ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।

उसके बाद भगवान कुबेर का आह्वान निम्न मंत्र से करें-

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

अंत में धन वैभव और सर्व रोग निवारणी माँ लक्ष्मी का जाप इस मंत्र से करे —

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

इसतरह पूजा विधि सम्पूर्ण करने के बाद सबकी आरती करे और यमराज को दीपदान करे और घर के मुख्य द्वार से दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाये ।




Story of Dhanteras | Dhanteras Pooja katha in Hindi | धनतेरस पूजन कथा

बहुत समय पहले हेम नामक एक राजा थे, उनकी कोई सन्तान नहीं थी. काफी पूजा और मनोकामनाओ के बाद उनको पुत्र रतन की प्राप्ति हुई । ज्योतिष के कुंडली के अनुसार बालक की शादी के दसवे दिन इसकी मृत्यु का योग था । यह सुनकर राजा हेम ने अपने पुत्र को ऐशी जगह भेजने का निश्चय किया जहाँ कोई स्त्री न हो । लेकिन घने जंगल में राजा के पुत्र को एक सुंदर कन्या मिली, जिससे उन्हें प्रेम हो गया और दोनों ने गंधर्व विवाह कर लिया । भविष्यवाणी के अनुसार पुत्र की दसवे दिन मृत्यु का समय आ गया । उसके प्राण लेने के लिए यमराज के दूत यमदूत पृथ्वीलोक पर आये । जब वे प्राण ले जा रहे थे तो मृतक की विधवा के रोने की आवाज सुन यमदूत के मन में भी दुःख का अनुभव हुआ, लेकिन वे अपने कर्तव्य के आगे विवश थे । यम दूत जब प्राण लेकर यमराज के पास पहुँचे, तो बेहद दुखी थे, तब यमराज ने कहा दुखी होना तो स्वाभाविक है, लेकिन हम इसके आगे विवश हैं । ऐसे में यमदूत ने यमराज से पूछा कि हे राजन क्या इस अकाल मृत्यु को रोकने का कोई उपाय नहीं हैं ? तब यमराज ने कहा कि अगर मनुष्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन कोई व्यक्ति संध्याकाल में अपने घर के द्वार पर एवम दक्षिण दिशा में दीप जलायेगा, तो उसके जीवन से अकाल मृत्यु का योग टल जायेगा । इसी कारण इस दिन यमराज की पूजा की जाती हैं और घर के मुख्य द्वार से दक्षिण दिशा की और दीप जलाने की परंपरा चलती आ रही है ।

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